जेएनएन, बरेली : प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने के नाम पर महिलाओं के खाते खुलवाए गए। इसके बाद उनसे लाखों का लेनदेन किया गया। आशंका जताई जा रही है कि टेरर फंडिंग के लिए इन खातों का उपयोग किया गया है। एक महिला को जब अपने खाते से लाखों के लेनदेन की जानकारी हुई तो वह एसएसपी के पास पहुंची। आरोपितों पर मुकदमा दर्ज कराने की मांग की।

कोतवाली के मुहल्ला मकरंदपुर सरकार निवासी किरन ने बताया कि करीब तीन महीने पहले उनकी मुलाकात मिनी बाईपास निवासी विनीता से हुई थी। उनसे प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने के बाबत जानकारी मांगी तो तीन युवकों के बारे में बताया। कहा कि वे मदद कर देंगे। इसके बाद उन्हीं तीन में से एक नेकपुर निवासी युवक से मुलाकात करवाई।

उसने खुद को डूडा कार्यालय में कर्मचारी बताते हुए दस महिलाओं का समूह बनाकर जीरो बैलेंस पर खाते खुलवाने को कहा। जिसके बाद किरन ने परिचित जरूरतमंद महिलाओं का समूह बनाया और आठ के खाते डीएम आवास के सामने एक प्राइवेट बैंक में खुलवा दिए, तीन महिलाओं ने अपने खाते नगरिया परीक्षित स्थित बैंक शाखा में खुलवाए। इसके बदले आरोपितों ने सभी से दो-दो हजार रुपये ले लिए। कुछ चेक हस्ताक्षर करवाकर भी रख लिए।

कुछ दिन पहले एक खातेदार नीलम के मोबाइल पर खाते में 12 लाख रुपये जमा होने का मैसेज आया। इस पर उन्होंने बैंक जाकर पासबुक में इंट्री करवाई तो रकम जमा होने के तुरंत बाद ट्रांसफर होने की जानकारी मिली। तब धोखाधड़ी का पता चला। आरोप है कि शातिर गिरोह ने उनके खातों से करीब 50 लाख रुपये का लेनदेन किया। यह जानकारी उन्होंने एक दूसरे को दी। इससे बात बढ़ने लगी।

किरन ने अपने समूह की महिलाओं के खाते खुलवाए थे, ऐसे में जब पोल खुलने लगी तो आरोपितों ने उन पर दबाव बनाया। आरोप है कि 15 अक्टूबर की शाम चार बजे एक आरोपित ने उन्हें अयूब खां चौराहा के पास बुलाया। कहा कि पांच लाख रुपये देकर अपने साथ की महिलाओं का मुंह बंद कर दो। रुपयों के लेनदेन की जानकारी किसी को न दी जाए। विरोध करने पर आरोपित उन्हें जान से मारने की धमकी देने लगा। इस पर वह शोर कर पास में पुलिस चौकी पर मौजूद पुलिसकर्मियों को आवाज लगानी लगीं तो आरोपित अपनी बाइक छोड़कर फरार हो गया। सोमवार को किरन ने एसएसपी शैलेष पांडेय से शिकायत करने पहुंची। तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराने की मांग की। इससे पुलिस मामले की जांच कर आरोपित को गिरफ्तार करें।

फहीम को बनाया मोहरा 

टेरर फंडिंग में परतापुर चौधरी निवासी सदाकत, फहीम और सिराजुद्दीन का नाम भी है शामिल है। इनमें फहीम सदाकत का कार चालक है, उसी के जरिये सारे काम कराए जाते थे। रिमांड के दौरान फहीम ने एटीएस के सामने सदाकत से जुड़े कई ऐसे राज बताए हैं। सिराज और फहीम की गिरफ्तारी के बाद एटीएस ने दोनों को पांच दिन की रिमांड पर लिया है जोकि अभी चल रही।टेरर फंडिंगमामले में लखीमपुर खीरी से पकड़े उम्मेद और बरेली से पकड़े फहीम रिश्तेदार हैं। ये दोनों सदाकत के लिए काम करते थे। उम्मेद को फहीम ने सदाकत से मिलवाया था। सदाकत और सिराजुद्दीन फहीम व अन्य लोगों के जरिये अपना सारा काम कराते थे।

रिमांड में खुल रहे अहम राज 

बताया जाता है कि रिमांड के दौरान एटीएस ने जब फहीम और सिराजुद्दीन और फहीम को अलग-अलग बैठाकर सवाल किए हैं। आतंकी फंडिंगकहां और किसे की गई इसके बारे में पूछा गया। एटीएस के अधिकारी की मानें तो सदाकत की गिरफ्तारी के बाद कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आएंगी। इसके लिए दबिशें जारी हैं।

सदाकत की तलाश में एटीएस

टेरर फंडिंगमामले में उप्र का मुखिया कहे जाने वाले सदाकत की तलाश में एटीएस के साथ-साथ लखीमपुर, पीलीभीत की पुलिस भी लगी हुई है। रविवार की रात को एटीएस ने पीलीभीत में दबिश दी थी। वहां उसकी मौजूदगी की जानकारी मिली मगर वह नहीं मिला। पुलिस अफसरों ने बताया कि सदाकत की तलाश को लगातार दबिशें चल रही हैं।

आज कर सकता है सदाकत सरेंडर

सदाकत ने अब अपने वकील के जरिये दोबारा सरेंडर अर्जी डाली है। जिसमें 22 अक्टूबर की तारीख है। माना जा रहा है कि वह मंगलवार को कोर्ट में सरेंडर कर सकता है। वहीं पुलिस इससे पहले ही उसकी गिरफ्तारी करना चाह रही है।

आतंकियों के लिए किया इस्तेमाल

आशंका है कि टेरर फंडिंग के लिए इन खातों का उपयोग किया गया। जिसमें सात से बीस लाख रुपये तक जमा कराए, जबकि किसी भी खातेदार को इसकी जानकारी नहीं थी। वैसे भी ढाई लाख रुपये लोन की इच्छा पर खाते खुलवाने वाली महिलाओं के लिए बड़ी रकम जमा कराना संभव नहीं है। खातों में रकम जमा करवाई गई फिर उसे ट्रांसफर कर दिया गया।

एलआइयू ने शुरू की मामले की जांच

टेरर फंडिंग की आशंका के चलते शिकायत के बाद ही एलआइयू समेत अन्य इंटेलीजेंस मामले की जांच को जुट गई है। खुफिया तौर पर सभी लोगों से पूछताछ की जा रही है। महिलाओं को पीएम आवास दिलवाने के नाम पर खाते खुलवाने वालों की तलाश शुरू कर दी गई है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही आरोपित गिरफ्त में होंगे।

तीन खातों के फोन नंबर पर संपर्क नहीं

नगरिया परीक्षित स्थित बैंक मैनेजर ने बताया कि हमारे यहां जीरो बैलेंस पर खाते नहीं खोले जाते। दो महिलाओं के खातों में सात-सात लाख रुपये जमा कराए गए थे। जमा कराने वाले वाउचर में उनके हस्ताक्षर हैं। बाद में उनके कहने पर ही खाते होल्ड कर दिए गए। खाते खुलते वक्त जो फोन नंबर दिए गए, अब कभी लगते नहीं तो कभी रिसीव नहीं होते।

 

Posted By: Abhishek Pandey

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