बरेली, जेएनएन। Tantra Ke Gan : कोरोना संक्रमण के चलते देश में 25 मार्च से लॉकडाउन शुरू हुआ तो बरेली कॉलेज में भी मुख्य परीक्षाएं चल रही थीं। लॉकडाउन की वजह से परीक्षाएं स्थगित हुईं और महाविद्यालय भी बंद हो गया। अगले कुछ महीने शिक्षण संस्थान बंद रहे। लॉकडाउन हटने और पढ़ाई दोबारा शुरू होने का माहौल नहीं दिख रहा था। ऐसे में बरेली कॉलेज के प्रोफेसरों ने खुद ऑनलाइन क्लास की पहल की। इसके लिए यू-ट्यूब का सहारा लिया और घर को ही क्लास रूम बनाकर पढ़ाई शुरू कर दी। खुद बरेली कॉलेज के प्राचार्य डॉ.अनुराग मोहन ने यू-ट्यूब चैनल के जरिए विद्यार्थियों से क्लास के जरिए पढ़ाई जारी रखने की अपील की।

यू-ट्यूब चैनल हर स्टूडेंट तक पहुंचाना था चुनौती : यू-ट्यूब चैनल के प्रभारी जंतु विज्ञान विभाग के एसोसिएट डॉ.राजेंद्र सिंह को बनाया गया। ऑनलाइन पढ़ाई को सफल बनाने के लिए यू-ट्यूब लिंक हर विद्यार्थी तक पहुंचाना जरूरी था। इसलिए प्रोफेसरों ने सोशल मीडिया का भी जमकर सहारा लिया। अधिकांश प्रोफेसर ने वाट्सएप, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर ग्रुप बनाकर यू-ट्यूब चैनल पर लिंक शेयर किए।

ऑनलाइन क्विज प्रतियोगिता भी रखीं : प्रोफेसर अपनी क्लास को रोज ऑफीशियल ग्रुप पर अपलोड कर देते। कोई भी विद्यार्थी अपनी सुविधा और समय से पढ़ाई कर सकता था। बीच-बीच में गूगल प्लेटफार्म पर क्विज प्रतियोगिता भी रखीं। जिससे बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि रहे और प्रतिस्पर्धा का माहौल बना रहे।

इन शिक्षकों के पड़े हैं वीडियो : वनस्पति विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो.आलोक खरे, असिस्टेंट प्रोफेसर शालिनी सक्सेना। जूलोजी में एसोसिएट डॉ.राजेंद्र सिंह, एजुकेशन में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.राकेश आजाद, अर्थशास्त्र विभाग से डॉ.कोमल मित्तल, भौतिकी विभाग के डॉ.वीपी सिंह ने क्लास शुरू की।

स्कूलों की वीरान दीवारों पर रंग भर कर बदल दी तस्वीर

बच्चों से खचाखच भरे रहने वाले स्कूल कोविड काल में वीरान हो गए। शिक्षक मोबाइल पर ऑनलाइन कक्षाएं पढ़ाने लगे, लेकिन नियमित कक्षाओं जैसी व्यस्तता कहां। रचनात्मकता की गुंजाइश समझते हुए सहायक शिक्षक जसवीर सिंह ने तुलिका और रंग उठा लिए। बेजान से स्कूल की दीवारों पर रंग भरकर उन्हें जीवंत कर दिया। दो महीने की कोशिशों के बाद स्कूल की सूरत ही बदल गई। उनके प्रयास को अब महकमा की सराहना मिली है।

मुख्यालय से 35 किमी दूर भुता ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय भिटौरा में सहायक अध्यापक जसवीर सिंह की तैनाती है। स्कूल में उनके अतिरिक्त प्रधानाध्यापक फिरोज हुसैन और शिक्षा मित्र अनिल कुमार भी हैं। दो जून 2016 से भर्ती के बाद जसवीर स्कूल की बेहतरी के लिए कुछ करना चाहते थे। कॉन्वेंट स्कूलों में वॉल पेंटिंग के जरिए परिसर को आकर्षक बनाते उन्होंने देखा था।

मौका मिला, जब कोविड काल में स्कूलों में बच्चों का आना थम गया। जसवीर के हाथ से चॉक छूटी तो उन्होंने कूची और रंग उठा लिए। इसमें आर्थिक मदद उन्हें प्रधानाध्यापक से भी मिली। बच्चों में जिज्ञासा पैदा करने के लिए अक्षर ज्ञान, सब्जी-फल के चित्र से लेकर फुलवारी उन्होंने दीवारों पर उकेर दी। अब गांव के लोग ही इस स्कूल को हैरत से देखते हैं।

एक सोच ने बना दिया इंटरनेट गुरु 

कोरोना काल में बच्चों की ऑनलाइन एजुकेशन की सोच ने शिक्षक डा. राजबहादुर को इंटरनेट गुरु बना दिया। आठ अप्रैल को पहली बार यू ट्यूब चैनल पर कोरोना जागरूकता गीत अपलोड किया। सराहना मिली तो बच्चों को पाठ्यक्रम सबंधी कविताएं व कहानियां गढ़कर अपलोड करना शुरू कर दीं। डा. राजबहादुर ने अपनी बेटी कृषिक के नाम से कृषिका ऑनलाइन क्लास यू ट्यूब चैनल को लांच कर उस पर शिक्षकों के लिए भी वीडियो अपलोड करने शुरू किए। अब तक मिशन प्रेरणा के 5, मानव संपदा के 12, सैलरी व आयकर के 6, दीक्षा प्रशिक्षण 24, विद्यार्थी के लिए 13, टीचर्स सॉल्यूशन के पांच वीडियो अपलोड कर वह ख्याति पा चुके हैं।

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