बदायूं, जागरण संवाददाता। Badaun News : यूपी के बदायूं में डिलीवरी कराने के नाम पर स्टाफ नर्स (Staff Nurse) और आशा ने पांच हजार रुपये की डिमांड की। मांग पूरी नहीं हुई तो आशा और नर्स ने प्रसूता के स्वजन को सबक सिखाने की धमकी दी। सामान्य प्रसव से गर्भवती ने एक बच्ची को जन्म दिया। लेकिन प्रसव के कुछ दिन बाद ही प्रसूता की हालत बिगड़ने लगी।कई जगह दिखाने पर भी आराम नहीं मिला तो फर्रुखाबाद के एक अस्पताल में ऑपरेशन कराया तो बच्चेदानी में दो पट्टी निकलीं।

प्रसूता के स्वजन ने नर्स और आशा पर जानबूझकर यह कृत्य करने का आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इस पर पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली। जिस पर सीजेएम कोर्ट (Badaun CJM Court) ने आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए।

मामला कादरचौक थाना क्षेत्र के गांव ककोड़ा से सम्बंधित है।इस मामले में लापरवाही कादरचौक सीएचसी (Kadarchowk  CHC) की स्टाफ नर्स और गांव की आशा पर हैं। न्यायालय में परिवादवाद दर्ज कराने के लिए प्रार्थना पत्र देने वाले ककोड़ा निवासी निजाकत अली ने बताया कि उनकी पुत्रवधु जैसमीन को 29 अक्टूबर 2021 को प्रसव पीड़ा शुरू हुई।

इस पर गांव की आशा सरोज से संपर्क किया तो वह पुत्रवधु को लेकर सीएचसी कादरचौक ले गई। जहां स्टाफ नर्स प्रकाशवती ने उसे भर्ती कराया। इसके बाद आशा और स्टाफ नर्स ने आकर कहा कि डिलीवरी यहीं हो जाएगी, लेकिन पांच हजार रुपये देने होंगे। इस पर निजाकत अली ने आर्थिक स्थिति ठीक न होने की बात कहते हुई 2000 रुपये दिए।

काफी कहने के बाद एक हजार रुपये और दे दिए। लेकिन आशा और सितफ नर्स पूरे पांच हजार रुपये देने की बात पर अड़ गई। इसी बीच 30 अक्टूबर को उनकी पुत्रवधु को सुबह के समय सामान्य डिलीवरी से ही एक बच्ची हुई। इसके बाद फिर आशा और नर्स ने बुलाया और पैसे देने की बात कही।

जब उन लोगों ने फिर से आर्थिक स्थिति की बात कही तो दोनों आग बबूला हो गईं और धमकी दी कि मत दो पैसे तुम्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा दो पैसे तुम्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इसके बाद वह अपनी पुत्रवधु को घर ले गए, लेकिन उसके पेट मे दर्द होता रहा।

इसकी जानकारी आशा को दी लेकिन उसने कोई सुनवाई नहीं की। बाद में अस्पताल ले गए तो वहां वही नर्स मिली, जिसने देखते ही कह दिया कि अस्पताल बंद है। इस पर वह लोग पुत्रवधु को लेकर फर्रुखाबाद के कायमगंज के प्राइवेट अस्पताल (Kayamganj Private Hospital) ले गए। जहां चिकित्सक ने ऑपरेशन किया तो बच्चेदानी में दो पट्टी (बैंडेज) निकली।

इसका डॉक्टर ने एक सर्टीफिकेट भी दिया।निजाकत अली का आरोप है कि पैसे ना देने के कारण नर्स और आशा ने जानबूझकर यह पट्टी बच्चेदानी में छोड़ दी। जिससे कि उनकी पुत्रवधू को काफी परेशानी हुई और इलाज में उनका 4.80 लाख खर्च हुआ जो कि उन्होंने कर्ज लेकर खर्च किया।

निजाकत ने बताया की वह शिकायत करने पुलिस के पास गया, लेकिन वहां सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उसने सीजेएम कोर्ट में परिवाद दर्ज करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। अब सीजेएम नवनीत कुमार भारती ने इस मामले में लापरवाही करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। साथ ही 9 सितंबर को साक्ष्य के साथ उपस्थित होने के आदेश दिए हैं। 

Edited By: Ravi Mishra