जागरण संवाददाता, बरेली : फिल्मे जीवन के लिए प्रेरणा भी दे सकती है ये कर दिखाया है बरेली की 'मैरीकॉम' नंदिनी ने। दसवी मे पढ़ने वाली नंदिनी ने मैरीकॉम फिल्म देखी और तय कर लिया कि इसी तरह मुक्केबाजी मे बरेली का नाम रोशन करना है, एक मुकाम पाना है। लक्ष्य के प्रति समर्पण और कड़ी मेहनत से दो साल के अंदर खुद को इस काबिल बनाया कि राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली मे आठ फरवरी को आयोजित हुई खेलो इंडिया प्रतियोगिता मे कांस्य पदक जीत लिया। शहर के आकांक्षापुरम की कक्षा 10 की छात्रा नंदिनी लाल ने यह कारनामा बिना कोच के ही अपने दम पर प्रैक्टिस करके हासिल किया। इसमे उनकी मदद एक सीनियर खिलाड़ी धर्मेद्र सिंह ने की। इस मुक्केबाज बिटिया की माली हालत भी बहुत अच्छी नही है। नंदिनी के पिता संजय एस लाल ट्रक ड्राइवर है, जबकि मां सोनी सिंह घरेलू महिला है। मुक्केबाज बिटिया अपनी जीत का श्रेय मां को देती है। वह अल्मा मातेर स्कूल मे कक्षा दसवी की छात्रा है और यूपी की टीम से राष्ट्रीय स्तर पर हुई खेलो इंडिया प्रतियोगिता के अंडर-17 वर्ग मे शामिल हुई थी। इनसेट कोच होता तो जीत सकती थी गोल्ड बरेली की बिटिया नंदिनी एस लाल ने बिना कोच के प्रैक्टिस की, क्योकि स्टेडियम मे मुक्केबाजी का कोई कोच नही है। इस वजह से सीनियर बॉक्सर धर्मेद्र ही उसे प्रैक्टिस करा देते थे। इस बारे मे नंदिनी का कहना है कि अगर नियमित कोच के अंडर मे प्रैक्टिस करती तो गोल्ड मेडल जीत सकती थी। इनसेट आरएसओ ने किया पुरस्कृत खेलो इंडिया मे कांस्य पदक जीतकर लौटी नंदिनी को प्रभारी आरएसओ डॉ. लक्ष्मी शंकर सिंह ने सम्मानित किया। इस मौके पर धर्मेद्र सिंह यादव, अविनाश कुमार आदि मौजूद रहे।