जागरण संवाददाता, बरेली : देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र राजनीति के बदलते रूप की एक झलक शनिवार को बरेली कॉलेज में भी दिखाई दी। कॉलेज में उर्दू की किताबों की बिक्री से खफा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने जमकर हंगामा काटा। इसके बाद नारे गूंजने लगे कि कॉलेज को एएमयू नहीं बनने देंगे। उर्दू के विरोध को लेकर उर्दू भाषी छात्रों से एबीवीपी कार्यकर्ताओं से टकराव की नौबत बन आई। आनन फानन कॉलेज प्रशासन ने उर्दू किताबों से भरी मिनी बस को कैंपस से बाहर कर मामला शांत किया। शनिवार को भारत सरकार की नेशनल काउंसिल फॉर प्रमोशन ऑफ उर्दू की ओर से प्रचार-प्रसार के लिए एक मिनी बस कॉलेज पहुंची थीं। इसमें उर्दू साहित्य की किताबें थें। इसके लिए कॉलेज प्रशासन से पहले ही अनुमति ली गई थी। सहयोग के लिए कॉलेज प्रशासन ने उर्दू विभाग की डॉ. शैव्या त्रिपाठी की ड्यूटी मिनी बस के साथ लगाई थी। दोपहर करीब बारह बजे के आस-पास एबीवीपी के महानगर मंत्री राहुल चौहान कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे। उर्दू की किताबें बिकती देख मिनी बस कॉलेज से बाहर करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। एएमयू नहीं बनने देंगे के नारे और आंतकी शब्दों के बीच उर्दू भाषी छात्र भी विरोध में आ गए। दोनों पक्षों में टकराव की भनक लगते ही कॉलेज प्रशासन के होश उड़ गए। इसके बाद एबीवीपी के छात्रों को चीफ प्रॉक्टोरियल कार्यालय में बुलाया और मिनी बस बाहर कराकर मामला शांत कराया गया। कॉलेज में उर्दू-अरबी विभाग है एबीवीपी ने कहा कि कॉलेज में उर्दू की किताबें नहीं बिकने दी जाएंगी। शिक्षकों ने उन्हें बताया कि यहां उर्दू-अरबी के विभाग हैं। फिर किताबों को लेकर आपत्ति क्यों। एएमयू में खुलवाएं संस्कृत विभाग एबीवीपी के छात्रों ने चीफ प्रॉक्टर ऑफिस में कहा कि एएमयू में संस्कृत विभाग खुलवाया जाए। ¨हदी का प्रचार क्यों नहीं किया जाता। इस पर शिक्षकों ने उन्हें बताया कि एएमयू में संस्कृत का विभाग वर्षो पहले खुला था। बरेली कॉलेज के विज्ञान के एक प्रोफेसर ने कहा कि अब एबीवीपी तय करेगी कि कॉलेज में क्या और कौन सी किताबें पढ़ाई जाएं। यह घटना निंदनीय है। प्रशासन को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए। एबीवीपी ने उर्दू की किताबें लेकर आई मिनी बस का विरोध किया। इसमें शामिल छात्रों को चिन्हित किया है। प्राचार्य के आते ही रिपोर्ट दी जाएगी। कार्रवाई का निर्णय बाद में होगा। डॉ. वंदना शर्मा, प्राचार्य बरेली कॉलेज