जेएनएन, शाहजहांपुर : चिन्मयानंद प्रकरण में विशेष जांच दल (एसआइटी) गुरुवार को अपनी जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश करेगा। इससे पहले टीम दो बार स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है। लॉ कॉलेज की छात्रा के साथ चिन्मयानंद के दुष्कर्म करने व चिन्मयानंद से ब्लैकमेङ्क्षलग के मामलों में छह नवंबर को जांच पूरी कर एसआइटी ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। 

चिन्मयानंद प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शासन ने एसआइटी का गठन किया था। इसकी निगरानी हाईकोर्ट को सौंपी थी। एसआइटी ने छह सितंबर से शाहजहांपुर आकर जांच शुरू की थी। एसआइटी प्रभारी आइजी नवीन अरोड़ा के नेतृत्व में टीम के सदस्यों ने करीब दो महीने तक पड़ताल की।

इस दौरान मिले साक्ष्यों व पूछताछ के आधार पर चिन्मयानंद को छात्रा से दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार कर 20 सितंबर को जेल भेजा था। उसी दिन उनसे ब्लैकमेङ्क्षलग के आरोप में संजय ङ्क्षसह, विक्रम ङ्क्षसह व सचिन सेंगर की गिरफ्तारी की थी। 25 सितंबर को चिन्मयानंद पर आरोप लगाने वाली छात्रा को भी उनसे ब्लैकमेङ्क्षलग के आरोप में जेल भेज दिया था।

वहीं, बाद में भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष जेपीएस राठौर के भाई व भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री डीपीएस राठौर और भाजयुमो के पूर्व जिला महामंत्री अजीत ङ्क्षसह के नाम भी ब्लैकमेलिंग के आरोप में चार्जशीट में शामिल किए थे। पांच नवंबर को जांच पूरी करने के बाद अगले दिन एसआइटी ने सीजेएम कोर्ट में 4700 पेज की केस डायरी व आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट 

23 को दी थी पहली स्टेटस रिपोर्ट 

इससे पहले एसआइटी ने 23 सितंबर को अपनी पहली स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट में दी थी। उसके बाद 22 अक्टूबर को इस मामले में दूसरी स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट में दाखिल की गई, जिसके बाद हाईकोर्ट ने 28 नवंबर को जांच रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे। 

105 लोगों से हुई पूछताछ

चिन्मयानंद प्रकरण में एसआइटी की जांच करीब 60 दिन तक जांच चली। इसमें 79 साक्ष्य जुटाए गए जबकि 105 लोगों से पूछताछ की गई। सात आरोपित बनाए गए, जिनकी 4700 पेज की केस डायरी तैयार हुई। कॉल डिटेल के अलावा मोबाइल डाटा व अन्य साक्ष्यों की विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) में जांच कराई गई।

चिन्मयानंद के मोबाइल को डिलीट डाटा को रिकवर कराने के लिए गुजरात की गांधीनगर स्थित डायरक्ट्रेट ऑफ फॉरेंसिक साइंस भेजा गया। कटोरी, पर्दे व तौलिया का भी मिलान किया गया। हालांकि, एसआइटी छात्रा का कैमरा लगा वह चश्मा नहीं ढूंढ पाई, जिससे चिन्मयानंद का वीडियो बनाया गया था। 

Posted By: Abhishek Pandey

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