जागरण संवाददाता, बरेली : बरेली कॉलेज में प्रोफेसरों की ड्यूटी अवकाश में फर्जीवाड़ा होने का बड़ा मामला सामने आया है। करीब 59 प्रोफेसरों ने ड्यूटी अवकाश का भुगतान लेने के लिए आवेदन तो कर दिया, लेकिन वे उसके सबूत नहीं दे सके। इस पर प्राचार्य ने नोटिस जारी कर आवेदन करने वाले प्रोफेसरों से सुबूत मांगे हैं।

दरअसल, प्रोफेसरों को प्रैक्टिकल, वायवा, कांफ्रेंस, सेमिनार समेत अन्य कामों के लिए सालभर में 30 ड्यूटी लीव मिलती हैं। यानी प्रोफेसर कैंपस से बाहर भी गए हों तो उनका वेतन नहीं कटेगा। अब, चूंकि वित्तीय वर्ष समाप्त होने की ओर से बढ़ रहा है। ऐसे में बरेली कॉलेज प्रबंधन पिछले साल का सारा हिसाब-किताब चुकता करने की मशक्कत में जुटा है। बताया जा रहा है कि करीब 59 से अधिक प्रोफेसरों ने ड्यूटी लीव के आवेदन फाइल में लगा दिए, मगर कोई साक्ष्य नहीं दिया। प्राचार्य ने कई फाइलों में तीस की तीस लीव एप्लाई देखीं तो साक्ष्य तलब कर लिए। इसके बाद से प्रोफेसरों में खलबली मची है।

कहां गए इसका सुबूत दें

दरअसल, प्रोफेसर जिस कॉलेज, या कार्यक्रम में जाते हैं, उसका कोई न कोई प्रमाण पत्र मिलता है। इसे वो साक्ष्य के तौर पर ड्यूटी लीव के साथ लगा सकते हैं। यहां भी अब प्रोफेसरों को अपने कार्यक्रम से मिले प्रमाण पत्र की कॉपी आदि पेश करनी होगी।

नोटिस से असहज प्रोफेसर

सूत्रों की माने तो प्राचार्य की ओर से नोटिस जारी होने के बाद कुछ शिक्षक असहज हैं। हालांकि कुछ शिक्षकों के पास कार्यक्रमों के साक्ष्य भी हैं, पर वे लगाने से भूल गए थे।

वर्जन

जिन प्रोफेसरों ने फरवरी में ड्यूटी लीव ली है। उसके प्रमाण मांगे हैं।

-डॉ.अजय शर्मा, प्राचार्य बरेली कॉलेज

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