बरेली, जेएनएन। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय ( MJP rohilkhand University) के EXAM 2019 की साख दांव पर लगी है। Campus में ही Setters गिरोह सक्रिय है, जो ठेके पर पास कराने का रैकेट चला रहा है। जांच में कुछ ऐसे सुराग मिले हैं, जिसने CODING AGENCY से लेकर परीक्षा और गोपनीय विभाग को शक के कठघरे में खड़ा कर दिया है। गर्दन फंसती देख जांच समिति पर भी लीपापोती का दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि, कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल ने स्पष्ट कर दिया है कि परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जांच रत्ती भर भी प्रभावित नहीं होगी, जो भी दोषी होगा, उस पर कड़ी कार्रवाई करेंगे। जांच के साथ रैकेट से जुड़े लोगों की बेचैनी बढऩे लगी है।

ABVP ने की थी ठेके पर पास कराने की शिकायत

पिछले दिनों एबीवीपी ने कुलपति से ठेके पर पास कराने की शिकायत की थी। विवि के तीन कर्मचारियों को नामजद आरोपित किया था। कुलपति ने तीनों के मोबाइल जब्त कर जांच बिठाई। सोमवार को जांच समिति ने तीनों कर्मचारियों से पूछताछ की। तब कर्मचारी, समिति के विरोध में लामबंद हो गए थे।

एक कर्मचारी ने कुबूला, PASS कराने में भूमिका निभाई

सूत्रों के मुताबिक, एक कर्मचारियों ने समिति के सामने कुबूला है कि उसने करीब पंद्रह छात्रों को पास कराने में भूमिका निभाई है। कैसे पास कराया। इसके जवाब में कहा कि कोडिंग वाली कॉपी को लेजर से देखकर रोल नंबर पहचान लेते थे। उस पर नंबर बढ़ाए जाते थे।

कर्मचारी के मोबाइल में AWARD LIST के चार्ट की कॉपी मिली

दूसरे कर्मचारी से पूछताछ में जो सुराग मिले हैं। वो, पूरे परीक्षा सिस्टम के ध्वस्त होने का संकेत हैं। कर्मचारी के मोबाइल में अवार्ड लिस्ट के चार्ट की एक कॉपी है। जो इस संदेह को पुख्ता करती है कि इस चार्ट से सीधे नंबर बढ़ाने के खेल चल रहा है। इसमें कंप्यूटर विभाग और कोडिंग एजेंसी की भूमिका संदिग्ध है।

क्या है AWARD LIST

कॉपी जांचने के बाद अंक चढ़ाने के लिए अवार्ड शीट कोडिंग एजेंसी के पास जाती है। दूसरी शीट, परीक्षा विभाग के कंप्यूटर विभाग में। दो शीट इसलिए तैयार होती ताकि अंक फीड करने में कोई चूक हो तो वह पकड़ में आ जाए। कर्मचारी के मोबाइल में अवार्ड शीट की पूरी लिस्ट मिली है। गोपनीय दस्तावेज मोबाइल में क्यों लिया गया? क्या पूरी अवार्ड लिस्ट ही बदलने का खेल चल रहा है। ऐसे कई सवाल हैं, जो इस जांच को और गहराई तक ले जाने की जरूरत जताते हैं।

ऐसे चढ़ाए जाते हैं NUMBER

मूल्यांकन के दौरान शीट पर एक कॉलम रोल नंबर का होता। दूसरा ओएमआरशीट और तीसरा अंकों का। जिस प्रश्न में छात्र को जो अंक मिलते, उन्हें ओएमआरशीट में गोला बनाने के साथ अंक के कॉलम में चढ़ाए भी जाते हैं। बाद में ओएमआरशीट की कॉपी लैब में अंक चढ़ाने के लिए भेजी जाती है। यहीं, पूरे खेल का राज छिपा है।

अवार्ड शीट की RANDOMLY जांच

प्रोफेसरों का मानना है कि यह खेल पिछले कई सालों से चल रहा है। इसकी जड़ तक पहुंचने के लिए रेंडमली AWARD LIST की जांच कराने की जरूरत है। तभी पूरा मामला सामने आ पाएगा।

ठेके के छोटे प्यादे हैं आरोपित

तीन सदस्यीय जांच समिति से एक सदस्य ने किनारा कर लिया है। समिति के सदस्य बताते हैं कि आरोपित कर्मचारी तो छोटे प्यादे हैं। इसमें बड़ा खेल है।

CODING AGENCY पर क्यों मेहरबान UNIVERSITY

रुविवि के प्रोफेसर CODING AGENCY पर गंभीर प्रश्न उठाते हैं। एक प्रोफेसर बताते हैं कि पिछले चार-पांच साल से एक ही एजेंसी को CODING का दायित्व दे रखा है। इससे गड़बड़ी की गुंजाइश बढ़ गई है। क्योंकि पिछले साल भी  CODING में सेंधमारी का मामला सामने आया था। इससे पहले हर साल कोडिंग पर सवाल उठते रहे हैं।

VC बोले- जांच किसी भी सूरत में प्रभावित नहीं होगी

VC प्रो. अनिल शुक्ल ने कहा कि जांच किसी भी सूरत में प्रभावित नहीं होगी। समिति जांच कर रही है। अगर इसमें कोई गड़बड़ी मिली, तो सख्त कार्रवाई करेंगे। किसी भी स्थिति में परीक्षा की साख बर्बाद नहीं होने देंगे। अभी आरोप हैं। असलियत जल्द सामने आएगी।  

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Posted By: Abhishek Pandey