शाहजहांपुर, जागरण संवाददाता। Shahjahanpur Sanskarshala 2022 : समकालीन समाज अतीत के किसी भी समाज से अधिक बातूनी है। संवाद के नए नए रूपों का जो विकास हुआ है, उससे केवल अपने परिचित और सम्बन्धियों से ही नहीं अपितु अपरिचित अनजान लोगों से भी संवाद हो रहा है।

इसका निर्विवादित श्रेय जाता है आज के इंटरनेट संचालित इंटरनेट मीडिया को। इंटरनेट मीडिया मंच या चौपाल में वार्ता है, काव्य है, प्रहसन है, नाटक है, फिल्मांकन है और न जाने कितनी अन्य विधाओं में विचारों का झटपट आदान-प्रदान हो रहा है।

वह भी अपलक ...कभी कभी अवाक कर देने वाला। इन सभी तौर तरीकों और माध्यमों में हो रहे संवाद और पारस्परिक विचार विनिमय में, बहस में यद्यपि बहुत कुछ जानकारीयुक्त, सूचनापरक सामग्री रहती है जो हमारा ज्ञानवर्धन और मनोरंजन करती है, पर इसमें हमारे पूर्वाग्रह भी शामिल हैं। हमारे अंधविश्वास भी शामिल हैं।

हमारी ढीठता और हमारे अनेक पारंपरिक घिसे-पिटे रूढ़िवादी रवैये भी सम्मिलित हैं। ऐसे में समाज के जागरूक लोगों को जैसे कालेज छात्रों, शिक्षकों, अधिवक्ताओं कलाकारों, पत्रकारों तथा कवियों, लेखकों को कुछ ऐसे उपाय, परिवर्तन और आंदोलन चलाने चाहिए कि इंटरनेट मीडिया मंचों और प्लेटफार्म पर साइट्स पर प्रगतिशील और वैज्ञानिक रीति नीति के विचारविमर्श को बढ़ावा मिले।

स्वयं का भोगा हुआ एक अनुभव है कि कुछ भी अच्छा लिखा या प्रगतिशील लिखा कि अनेक लोग न जाने कितनी अभद्र और अप्रासंगिक टिप्पणियों से टूट पड़े…धमकी तक देने लगे। जबकि ऐसे लोगों को जो किसी के विचार से नहीं सहमत हैं या असंतुष्ट हैं तो उसे शालीन भाषा में तर्क, वितर्क, के साथ सतर्क दृष्टि से खंडन करें।

अच्छे उन्नत विचारों की प्रशंसा और प्रशस्ति करें। दैनिक जागरण की कहानी भी सार यही है। कहानी की पात्र राखी इंटरनेट मीडिया पर अभिव्यक्ति की हड़बडाहट में आहत हुई, लेकिन जब उसकी प्रतिद्वंद्वी डिबेटर ने सेल्फी लेकर इंटरनेट मीडिया पर साझा कर सकारात्मक अभिव्यक्ति दी, तो मायूस राखी चहक उठी। यही संस्कार हमें भी अपनाना चाहिए।

इंटरनेट मीडिया में कभी कभी अकस्मात जातिवादी, धर्मवादी और वर्गवादी असंतुलित बातें पढ़ने, देखने, सुनने को मिलती हैं जो बड़ी एकांगी होती है। आधारहीन होती हैं। अध्ययन और मनन, चिंतन से लिखी गईं या पोस्ट की गई किसी भी सामग्री का वजन होता है, प्रभाव होता है।

एक बड़ी समस्या है गाली गलौज से भरे अश्लील संवाद, वीडियो और अपमानजनक पोस्ट्स। ऐसी अवांछित बातों और सामग्री से सबसे बड़ा नुकसान स्कूली बच्चों का होता है । बच्चे ऐसी अवांछित अश्लील भाषा और वीडियो आडियो पढ़ते, देखते और सुनते हैं तथा इसका जाने अनजाने साझा कर और प्रसार करते हैं।

इन सबसे छात्रों का ध्यान भंग होता है। पढ़ाई लिखाई की जगह अनापशनाप चिंतन और व्यवहार से उनकी एकाग्रता भंग होती है। पढ़ाई लिखाई में बड़ा व्यवधान आता है। अनेक बार सोशल साईट्स पर बड़ी उपयोगी सामग्री दी गयी होती है। मातापिता तथा शिक्षक छात्रों से ऐसी सामग्री पढ़ने देखने को वीडियो या लिंक साझा कर देते हैं।

छात्रों को कभी कभी इन्हीं ज्ञानवर्धक लिंक्स के माध्यम से अनेक अच्छे प्रोजेक्ट्स मिलते हैं। इन सभी में सावधानी की ज़रूरत है। शिक्षकों तथा अभिभावकों को भी चैतन्यता बरतनी होगी, कि वे न केवल स्वयं सावधान और सतर्क रहें, अपितु बच्चों के द्वारा प्रयोग में लायी जा रही डिवाइस, गैजेट्स और इंटरनेट चालित अन्य साधनों पर नजर रखें। बच्चों से बातें करें और समझने की कोशिश करें कि बच्चे के मन मष्तिष्क में क्या चल रहा है।

इंटरनेट एक बड़ी सशक्त सुविधा है, जो दिग्दिगंत और दिशा दिशान्तर से ब्रह्मांड के कण कण से हमें जोड़ती है। बस ज़रूरत है सतर्कता और अपनी आवश्यकता के अनुसार प्राथमिकता तय करने की...। सावधानी और धैर्य के साथ सदैव उपयुक्तता के विकल्प पर केंद्रित रहने की...। आवश्यक आवश्यकता के लिए इंटरनेट साइट्स का प्रयोग करें, शेष सबसे स्वयं मिलने जुलने की कोशिश करें। इंटरनेट संचालित कोई भी प्लेटफार्म एक साधन है न कि साध्य। सेवक है साधन है इंटरनेट का अंतर्ताना....इससे जुड़कर सीखें मानवता का तानाबाना...। अनुराग पांडेय हिंदी प्रवक्ता, केंद्रीय विद्यालय प्रथम, शाहजहांपुर

Edited By: Ravi Mishra