बरेली, जागरण संवाददाता। Bareilly Sanskarshala 2022 : आज का आधुनिक समाज इंटरनेट के बगैर अधूरा है, लेकिन सामाजिक परिवेश में इंटरनेट का प्रयोग सावधानी के साथ करने की जरूरत है। अगर, भारतीय संस्कृति और संस्कारों को आने वाले पीढ़ी के लिए बचाना है तो युवा पीढ़ी पर कुछ अंकुश लगाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

दैनिक जागरण के अंक में संस्कारशाला के कालम में प्रकाशित इंटरनेट मीडिया पर बहस के संस्कार कहानी के माध्यम से राजकीय हाईस्कूल दलपतपुर की प्रधानाचार्य अनीता सक्सेना ने छात्रों को इंटरनेट के प्रयोग के दौरान सावधानी बरतने की सीख दी। कहा, यह पूर्णतः सही नहीं है की इंटरनेट मीडिया समाज के लिए खतरा है।

यह लोगों पर निर्भर करता है कि इसका प्रयोग वे किस तरह और किस नजरिए से कर रहे हैं। अगर सोशल मीडिया का प्रयोग समुचित ओर सुव्यवस्थित ढंग से किया जाए तो यह एक अच्छा माध्यम साबित हो सकता है। बच्चों को यह समझना चाहिए कि उन्हें सबसे अधिक इंटरनेट का प्रयोग अध्ययन के लिए करना चाहिए।

लेकिन अगर इंटरनेट मीडिया का प्रयोग भ्रामक और अवांछित तरीके से होगा तो यह समाज के लिए खतरा बन सकता है।सोशल मीडिया महज नाम से ही सोशल है। सारे रिश्ते-नातों को अंगूठा दिखाया जा रहा है। इंटरनेट मीडिया पर सुख-दुख, क्रोध, अपमान, निराशा का एक पूरा संसार रचा जा रहा है।

समय के साथ चलना और बदलाव अवश्य ही बुद्धिमत्ता का परिचायक है पर इसके विकराल होते जा रहे भ्रमजाल में जकड़ते जाने के कारण हमारी संस्कृति-सभ्यता के मानदंडों, पारिवारिक, सामाजिक प्रतिष्ठा एवं नैतिक मूल्यों के क्षतिग्रस्त होने की आशंका से भी इन्कार नहीं किया जा सकता। ऐसे में पारिवारिक, सामाजिक, कानूनी नियंत्रण और सुझावों से ही इस समस्या का समाधान किया जा सकता है।

Edited By: Ravi Mishra