पीलीभीत, जागरण संवाददाता। Pilibhit Sanskarshala 2022 : भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 भारत के प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा अपने विचारों को व्यक्त करने का अधिकार प्रदान करता है। इसके अनुसार हम अपने विचारों को कुछ निर्बंधनों को ध्यान में रखते हुए सामाजिक रूप से लेखन, इंटरनेट मीडिया, प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रानिक मीडिया, वीडियो, कार्टून, चित्र या अन्य किसी माध्यम से व्यक्त कर सकते है ।

इन सभी में इंटरनेट मीडिया एक ऐसा माध्यम है जो आज हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा बन चुका है। परंपरागत मीडिया इंटरनेट के आविष्कार के पहले से ही आमजन को सांस्कृतिक, सामाजिक, कानूनी व नैतिक मुद्दों के संबंध में जागरूक करने व उनका मार्गदर्शन करने का कार्य कर रहा है।

इसीलिए मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है परन्तु इंटरनेट की क्रांति के पश्चात आज हर उपयोगकर्ता अपने आपमे एक स्वतंत्र मीडियाकर्मी की भूमिका में है। जो कि व्यक्तिगत स्तर पर अपने विचार किसी भी समय, किसी भी स्थान से रख सकता है। इंटरनेट मीडिया एक अपरंपरागत और समानांतर मीडिया है।

जिसका जन्म लोगों को देश और दुनिया की स्वास्थ्य, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीति आदि से संबंधित सूचनाओं को द्रुतगति से पहुंचाने के लिए हुआ था, परन्तु समय के साथ साथ मुद्दों पर स्वस्थ बहस के लिए मंच प्रदान करने वाले और संचार के इस बेजोड़ माध्यम के कुछ दोष भी सामने आ रहे है।

आज के समय में बिना किसी प्रतिबंध के इंटरनेट मीडिया पर अपने हर विचार और अपनी व्यक्तिगत राय को प्रेषित करने, किसी भी मुद्दे पर अपना निर्णय देने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। हाल ही में सेवानिवृत्त हुए भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना के अनुसार आज, सोशल मीडिया पर जो एजेंडा संचालित बहस होती है।

वो हमारे लोकतंत्र को कमजोर कर रही है। इंटरनेट मीडिया पर उपयोगकर्ता किसी भी मुद्दे पर एक कंगारू कोर्ट की तरह बिना किसी का पक्ष जाने अपना निर्णय सुना देते है। इन गतिविधियों और मीडिया परीक्षणों की बढ़ती हुई संख्या के कारण न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्ष कामकाज प्रभावित होता है।

प्रिंट मीडिया काफी हद तक अपने द्वारा प्रेषित की गई जानकारी पर जिम्मेदारी सुनिश्चित करता है परन्तु इंटरनेट मीडिया में इसकी जिम्मेदारी किसी पर तय नहीं की जाती है। आज के समय में यदि इंटरनेट मीडिया पर आप किसी भी घटनाक्रम की कोई पोस्ट, फोटो, वीडियो या लेख पढ़ते है।

उसकी वास्तविकता जाने बिना ही उस पर तुरंत अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अपना निर्णय भी सुना देते है कि इस घटना का दोषी उक्त व्यक्ति या उक्त विभाग है। आपके द्वारा दी गई प्रतिक्रिया कुछ ही पलों में लाखोँ करोड़ों लोगो तक पहुंच जाती है और यहां से आरंभ होता है कभी न ख़त्म होने वाला लाइक, डिसलाइक, सब्सक्राइब और शेयर का जंजाल।

यदि हम अपने आस पास की ही बात करें तो विगत कुछ वर्षों में हमने ऐसे कई मुद्दों जिन सुनवाई या जांच चल रही है, उसमें भी अपना निर्णय स्वयं से ही इंटरनेट मीडिया की जानकारी के आधार पर ले लिया। यद्यपि इंटरनेट मीडिया पर प्रतिबंध लगाने व जिम्मेदारी तय करने की अपेक्षा यदि हम अपने आप में कुछ सुधार कर लें तो इंटरनेट मीडिया हमारी अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त संसाधन बन सकती है।

इसके लिए इंटरनेट मीडिया पर आप जो भी पोस्ट, सूचना चाहे वह लेख,चित्र,कार्टून या वीडियो के रूप में हो, देखें तो उस पर अपनी प्रतिक्रिया देने से पहले या किसी प्रकार की बहस में पड़ने से पहले उस सूचना की वास्तविकता, जैसे समय, व स्थान आदि सुनिश्चित कर लें। यदि आवश्यक हो तभी अपनी प्रतिक्रिया दें, और अग्रेषित करें।

आपका एक निर्णय गलत पोस्ट या सूचना के परिसंचरण को रोक सकता है । प्रतिक्रिया देते समय या बहस में अपनी भाषा वही रखे जो आप अपने स्वजन से संवाद के समय उपयोग करते हैं। आपकी प्रतिक्रिया किसी भी प्रकार के क्षेत्रवाद, जातिवाद, नस्लवाद, राजनीतिक अवधारणा आदि से प्रेरित तथा निजता का हनन करने वाली, सामूहिक चेतना दूषित करने वाली नहीं होनी चाहिए।

सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं में कोई संदेह नहीं है लेकिन इंटरनेट मीडिया के उपयोगकर्ताओं को अपने विवेकाधिकार का उपयोग करना चाहिए। अंत में इसी आशा के साथ कि इंटरनेट मीडिया भी एक परिवार के समान ही संवाद, स्वस्थ विचार विमर्श और सूचनाओं के आदान प्रदान का मंच बन कर उभरेगा। मुनेंद्र पाल गंगवार, शिक्षक (जीव विज्ञान), केंद्रीय विद्यालय पीलीभीत

Edited By: Ravi Mishra