बरेली, जेएनएन। Saheed Saraj Singh: चार दिन से बलिदानी पति सारज सिंह की झलक पाने को बेताब वीरनारी रंजीत कौर घर में शव आते ही दौड़ पड़ी। ताबूत खुलते ही सारज का चेहरा देखा और बेहोश हो गई। अंतिम संस्कार तक तीन बार बेहोश हुई।

वीर पति के सम्मान में आंसू भी नहीं निकलने दिए। अंतिम विदाई के बाद सुहाग की निशानी के रूप में पार्थिव देह का तिरंगा लेकर जब घर लौटी तब वीरनारी ने गम के बीच गौरवान्वित होकर मन के विचार रखे। बोली भारतमाता की रक्षा के लिए सुहाग के न्योछावर होने पर गर्व है। वह देश वास्ते कहकर गए, थे। बोले थे, जल्द आएंगे। वह चले गए, लेकिन देश वास्ते वादाखिलाफी कर गए। लेकिन उनकी यादों के साथ तिरंगे के सहारे जिंदगी काट लूंगी। वह बोलीं उनके पति देश की सेवा करते हुए अमर हो गए।

बंडा के वीर को भावुक विदाई हर आंख भर आई

बलिदानी सारज सिंह का पार्थिव शरीर गुरुवार को गांव पहुंचा। बलिदानी के अंतिम दर्शन के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा, सभी की आंखें नम थी लेकिन सीना गर्व से चौडा। हर किसी के अंदर बदले की भावना थी। लोगों ने सारज सिंह अमर रहें और जो बोले सो निहाल शत श्री अकाल के जयकारे लगाए, साथ ही पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। गुरुवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे सेना के अधिकारी फूलों से सजे वाहन में सारज सिंह की पार्थिव देह लेकर गांव अख्तियारपुर धौकल पहुंचे। ताबूत खोलते ही सारज के पिता विचित्र सिंह, मां परमजीत कौर, पत्नी रंजीत कौर को संभालना मुश्किल हो गया। विलाप करते देख वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गई। 

Edited By: Ravi Mishra