बरेली, अतीक खान : एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय की टॉपर लिस्ट में हर साल लड़कियां छाई रहती हैं। इस बार के टॉपरों की तस्वीर अभी तक साफ नहीं हो पाई है, मगर छात्राओं का एक अनोखा रिकॉर्ड कॉफी चर्चा में हैं। यह कि उन्होंने नकल के मामले में भी छात्रों को पछाड़ दिया है।

रुविवि की शैक्षिक सत्र 2018-19 की मुख्य परीक्षा 25 फरवरी से 25 अप्रैल यानी पूरे दो महीने तक चली। इसमें पांच लाख से अधिक छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे। परीक्षा में इस साल करीब 2007 नकलची पकड़े गए हैं। यह संख्या पिछले कई सालों में सर्वाधिक है। पिछले साल करीब पांच सौ के आस-पास नकलची पकड़े गए थे। इस बार पकड़े गए नकलचियों में लड़कियों की संख्या 1419 से अधिक रही।

सचल दलों की छापेमारी में एक-एक दिन में सैकड़ों की संख्या में नकलची पकड़े गए थे। इसमें छात्राओं की संख्या सर्वाधिक थी। एक दिन में सैकड़ों नकलची पकड़े जाने का मामला शासन तक भी गूंजा था। इसके बाद से विवि की कार्रवाई में थोड़ी सख्ती दिखाई दी। हालांकि, परीक्षा के आखिर तक पकड़े गए नकलचियों की संख्या चौंकाने वाले स्तर तक जा पहुंची। यह हाल तब था, जब सीसीटीवी-वॉयस रिकॉर्ड के बीच परीक्षाएं चल रही थीं। बहरहाल नकल पर कार्रवाई की रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।

प्रोफेशनल परीक्षा में नहीं सख्ती

विवि प्रशासन ने मुख्य परीक्षा में जैसी सख्ती दिखाई थी। वैसी प्रोफेशनल और सेमेस्टर परीक्षा में नजर नहीं आ रही है। इससे विवि प्रशासन पर प्रश्न उठने लगे हैं, क्योंकि प्रोफेशनल-सेमेस्टर कोर्स संचालित करने वाले अधिकांश कॉलेज राजनीति से जुड़े लोगों के हैं।

नकल के कुछ मामले पकड़े

तिथि छात्र छात्राएं

एक मार्च 12 59

पांच मार्च 05 683

सात मार्च 6 6

बारह मार्च : 20 16

25 मार्च : 00 13

परीक्षा नियंत्रक बोले- शासन को भेजी गई रिपोर्ट

परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार ने बताया कि शासन की मंशा के अनुरूप विवि ने नकलविहीन परीक्षा के लिए सशक्त तंत्र बनाया था। आंतरिक और विवि के सचल दस्तों ने नकल पकड़ी। रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है, संख्या की जानकारी नहीं है। 

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Posted By: Abhishek Pandey