बरेली, जेएनएन: साइबर ठगी के मामले में दिल्ली क्राइम ब्रांच ने शुक्रवार को धंतिया गांव में दबिश देकर एक युवक को पकड़ा है। टीम उसे अपने साथ ले गई। दो घंटे चली कार्रवाई के दौरान कई अन्य फरार हो गए। इस कार्रवाई में क्राइम ब्रांच ने स्थानीय पुलिस को अपने साथ नहीं लिया। आशंका थी कि दबिश की सूचना लीक हो सकती है।

फतेहगंज पश्चिमी का धंतिया गांव साइबर ठगों का ठिकाना है। 21 जुलाई को तत्कालीन एएसपी अभिषेक वर्मा ने दबिश देकर जमशेद खां, यूसुफ, रफीक, ताहिर, साजिद, राशिद, आमिर, नासिर, वारिस समेत 14 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पूछताछ में पता चला था कि दस साल के अंदर जमशेद ने गांव के करीब सात सौ लोगों के खाते खुलवाए। खाता नंबर दिल्ली में बैठे साइबर ठगी करने वाले सरगना को दे देता था। इन्हीं खातों में ठगी की रकम आती थी। उसमें 15 फीसद रकम खाताधारक व दस फीसद जमशेद अपने लिए काटने के बाद बाकी रकम सरगना के पास दिल्ली पहुंचा देता था।

चचेरा भाई गिरफ्त में, जमशेद फरार

एक सप्ताह पहले जमशेद समेत सभी 14 आरोपितों को हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। शुक्रवार शाम करीब चार बजे दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम गांव पहुंची। सबसे पहले जमशेद के चचेरे भाई मुर्शीद के घर पहुंचकर उसे पकड़ लिया। इस बीच भनक लगते ही जमशेद व उसके अन्य साथी घरों से फरार हो गए। टीम करीब दो घंटे गांव में रही। आठ अन्य के घर पहुंची, मगर ताले लगे थे। माना जा रहा है कि मुर्शीद से साइबर ठगी से जुड़े अहम सुराग मिले हैं।

सोमवार को भी आई थी क्राइम ब्रांच

धंतिया गांव में सोमवार को भी दिल्ली क्राइम ब्रांच आई थी। उस दौरान भी चार लोगों को उठाया था लेकिन बाद में सभी को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया था। उस दौरान क्राइम ब्रांच पर सांठगांठ के आरोप लगे थे।

स्थानीय पुलिस पर किसी को भी नहीं भरोसा

जुलाई में जब एएसपी अभिषेक वर्मा ने गांव में दबिश दी थी, तब भी थाना पुलिस को साथ नहीं लिया था। इसके बाद दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम भी स्थानीय पुलिस को लिए बिना गांव पहुंची। आशंका जताई जा रही कि थाना पुलिस को साथ लेने में सूचना लीक हो सकती है।

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दिल्ली क्राइम ब्रांच के आने की जानकारी नहीं मिल सकी। हो सकता है दबिश दी हो। मालूम करेंगे कि ठगी में किन लोगों का जुड़ाव है।

-चंद्र किरण यादव, एसएचओ फतेहगंज पश्चिमी

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