बरेली, जेएनएन। Pilibhit Tiger Reseve : पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगल में लगभग आधा दर्जन स्थानों पर ऊंचे मचान बनाए जाएंगे। इन्हें बनाने का प्रमुख उद्देश्य तो वन्यजीवों की सुरक्षा एवं निगरानी है लेकिन ये पर्यटकों के लिए भी आकर्षण के केंद्र रहेंगे। वैसे भी चूका के अलावा अन्य स्थलों को भी पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाया जा रहा है।

टाइगर रिजर्व बनने के बाद से जहां एक तरफ वन्य जीवन का सुरक्षा घेरा मजबूत किया जाता रहा है, वहीं दूसरी तरफ समय बीतने के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा देने के लिए कुछ आकर्षण केंद्र और सेल्फी प्वाइंट स्थापित किए जा रहे हैं। प्रभागीय वन अधिकारी द्वारा कुछ जगहों को चयनित कर आकर्षण केंद्र स्थापित करने के पत्र शासन को भेजा था। जिस पर शासन द्वारा अंतिम मोहर लगा दी गई थी।

लगभग आधा दर्जन से ज्यादा ऊंचे मचान उन जगह बन चुके हैं, जहां पर्यटक रुक कर वन्य जीवन का नजारा ऊंचाई से कर सकें। इसी के साथ माधोटांडा- खटीमा मार्ग और चूका गेट पर दो विशाल द्वारों का निर्माण किया गया, जिसे को वन्यजीवों की आकृतियों से सजाया गया है। ऊंचे मचान का निर्माण बाइफरकेशन से चूका पक्की पटरी पर, दूसरा मचान लालपुल से चूका पिकनिक स्पॉट के बीच ग्रास लैंड में, तीसरा मचान माधोटांडा खटीमा मार्ग स्थित लालपुल के समीप, जबकि चौथा ऊंचा मचान बराई रेंज में साइफन डबल नहर पर स्थापित किया गया है।

वर्ष 2019-20 सत्र और 20-21 कोविड-19 महामारी के चलते पर्यटन पर काफी असर पड़ा था। इसी कारण कुल पर्यटक 19,511 जंगल का लुफ्त उठा सके। इनसे कुल पर्यटन आमदनी लगभग 20 लाख के आसपास रही। इस बार वन निगम द्वारा पांच टाटा जुनून गाड़ी,जंगल के आसपास रह रहे ग्रामीणों द्वारा 16 जिप्सी, और जिले के 35 युवा पर्यटक मित्र (टूरिस्ट गाइड) नए सत्र में पर्यटकों के लिए उपलब्ध रहेंगे। साथ ही जल्द डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी नरेश कुमार द्वारा पर्यटक मित्रों के साथ कार्यशाला की जाएगी।

पर्यटन से पहले वन्यजीवों की सुरक्षा जरूरी

पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वन अधिकारी नवीन खंडेलवाल कहते हैं कि भले ही पर्यटन से काफी राजस्व सरकार तक पहुंचता है लेकिन इसके साथ हमारी प्राथमिकता वन्य जीवन की सुरक्षा है। वन्य जीवन की सुरक्षा के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं बर्दाश्त की जाएगी। ना ही वन्यजीवों की उपस्थिति वाली जगह पर पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। पर्यटक केवल बाघ देखने के उद्देश्य जंगल भ्रमण न करें बल्कि कुदरत द्वारा दिए गए अनेक जीव जंतु और पेड़-पौधों एवं जल धाराओं का लुफ्त उठाने के उद्देश्य से जंगल भ्रमण करें।

Edited By: Ravi Mishra