जेएनएन, बरेली :बंदरों का खौफ लोगों के मन में यूं ही नहीं। उनके दांत और नाखूनों की खरोंचे लोगों के बदन से ज्यादा दिलो-दिमाग पर नक्श हो गई हैं। आतंक कम होने के बजाय और बढ़ गया। जिला अस्पताल के आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं। बंदरों का शिकार हुए 10-15 लोग प्रतिदिन अस्पताल पहुंच रहे हैं। औसतन 400 मरीज प्रतिमाह एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने आ रहे हैं।

प्राइवेट अस्पतालों का भी रुख कर रहे लोग

जिला अस्पताल और नजदीकी सीएचसी के अलावा कई क्षेत्रों में लोग स्थानीय प्राइवेट अस्पताल में भी इलाज के लिए पहुंचते हैं। अलग-अलग रिकॉर्ड तो नहीं रखा जाता, लेकिन अनुमानित तौर पर औसतन प्रतिदिन 10-12 मरीज अलग-अलग प्राइवेट अस्पतालों में भी जाते हैं।

यह है जिला अस्पताल का आंकड़ा

माह मरीज (लगभग)

जून 380

जुलाई 350

अगस्त 395 वर्जन..

बंदरों ने शहर के लोगों को बहुत परेशान कर रखा है। जिला अस्पताल में ही प्रतिदिन लगभग 15 मरीज एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने आते हैं।

- डा. सूरज पांडेय

आज व्यापारी करेंगे डीएफओ का घेराव

कॉलोनियों, मुहल्लों से लेकर बाजारों तक में बंदर परेशानी का सबब बनने लगे हैं। दुकानों के बाहर से सामान उठा ले जाते हैं। सामान बिखरा देते हैं, वहीं ग्राहकों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। तीन साल में तमाम बार नगर निगम और वन विभाग में गुहार लगाने के बावजूद सुनवाई न होने पर उप्र व्यापार प्रतिनिधि मंडल के सदस्य बुधवार को जिला वन अधिकारी का घेराव करेंगे। महानगर अध्यक्ष शोभित सक्सेना ने बताया कि अब भी मांगों को न सुना गया तो व्यापारी आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

Posted By: Jagran