अशोक आर्या, बरेली :कुछ कच्चे, कुछ पक्के घर। हर घर के बरामदे से लेकर भीतर आंगन तक बिछी खाट। इन खाट पर पड़े मलेरिया, बुखार से कराहते लोग। ये दृश्य किसी महामारी प्रभावित क्षेत्र के नहीं, बल्कि अपने ही जिले के मझगवां ब्लॉक में रामगंगा किनारे बसे गांवों के हैं। हर घर में तीन से चार लोग बुखार से तप रहे हैं। दैनिक जागरण टीम ने इन गांवों में हकीकत टटोली तो स्वास्थ्य विभाग का नेटवर्क, सर्विलांस और तमाम दावे ध्वस्त पड़े मिले। स्वास्थ्य केंद्र से रोगी भगाए जा रहे हैं और झोलाछापों की दुकान गुलजार है। अफसर खुशफहमी की चादर ओढ़े नींद में हैं।

यहां नहीं मिलती सरकारी सेवा

रामगंगा से अखा-बिशारतगंज मार्ग पर गांव मुशरकपुर है। यहां पेड़ के नीचे बैठे सोमपाल बोले, सरकारी अस्पताल में कोई सुनता नहीं। दवा भी नहीं मिलती। पास बैठे नेमपाल ने सामने ही एक झोलाछाप की दुकान दिखाई। बोले, यहां पिछले हफ्ते भर में 25 बोतल चढ़ चुकी हैं। हजार रुपये भी खर्च हो गए। कुछ ही आराम है। तभी पास बैठे दोदराम बोले, भैया 15 दिन से बुखार है।अस्पताल में जांच भी की। बुखार से कोई घर नहीं बचा। आदमी बर्बाद हो गया है। यहां से आगे मझरा मुशरकपुर पश्चिमी में पेड़ के नीचे इसी गांव के छदम्मी लाल, भगवान दास, मूलचंद, राजपाल, ओमकार बातचीत करते दिखे। वहां पहुंचने पर पता चला विषय बुखार ही है। इनका कहना है कि हर घर में मरीज हैं। आधी रात को लेकर भागना पड़ता है। सरकारी सेवा यहां नहीं मिलती। न बीमारी से बचे के जतन कराए गए।

बुखार से हुई दो की मौत, कई बीमार

 इसी रोड पर आगे गांव बलेई भगवंतापुर में कुछ ग्रामीण बुखार में ही काम करते मिले। गांव वालों से पता चला कि यहां के विनोद मौर्य की पत्नी मीना और ताराचंद की मां हरप्यारी की कुछ दिन पहले ही बुखार से मौत हो गई थी। कई लोग अभी भी बुखार की चपेट में हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में अब तक एंटी लार्वा, डीडीटी का छिड़काव नहीं कराया गया है।

गांव में नहीं हो रहा डीडीटी का छिड़काव 

स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि गांवों में घरों के अंदर तक दवा छिड़की जा रही है। मलेरिया के संवेदनशील गांव बेहटा बुजुर्ग के लोग इस दावे को खारिज करते हैं। कश्यप मुहल्ले में छविराम, कल्लू, सुरेशपाल ने बताया कि घर तो छोड़िए, गांव में ही डीडीटी नहीं छिड़की गई। आरोप लगाए कि प्रधान ने अपने खास लोगों के घरों तक दवा छिड़कवाई। हालांकि यहीं के इतवारीलाल, सोनपाल ने दवा का छिड़काव होना बताया।

बल्ली पर लटका रखी थी ग्लूकोज की बोतल 

मुशरकपुर में इसी गांव का विनोद नाम का युवक क्लीनिक चलाता मिला। उसके यहां कई खटिया पड़ी हुई थी। उसमें से तीन में फ्लूड की बोतलें डंडों पर लटकी थीं। एक खटिया पर 19 वर्षीय संतोष के ग्लूकोज चढ़ रहा था। वहां तीन और ग्रामीण दवा लेने पहुंचे थे।

Posted By: Abhishek Pandey

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