यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 13, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बढ़ने लगी संख्या, एक बेड पर दो-दो मरीज भर्ती Bareilly News
पिछले साल बदलते मौसम में बुखार डायरिया के मरीज बढ़ने के कारण महिला अस्पताल का भी वार्ड लिया था। इस बार भी वहां एक वार्ड सुरक्षित किया गया है।

बरेली, जेएनएन : मौसम के बदलने के साथ ही जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है। मरीजों की अचानक संख्या बढ़ने के कारण अस्पताल में बेड की कमी होने लगी है। इसके चलते अस्पताल में एक बेड पर दो-दो मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है। यही हाल बच्चा वार्ड का भी हैं। यहां भी क्षमता से अधिक मरीज भर्ती किए गए हैं।
जिला अस्पताल की क्षमता सवा तीन सौ बेड की है। पिछले साल बदलते मौसम में बुखार, डायरिया के मरीज बढ़ने के कारण महिला अस्पताल का भी वार्ड लिया था। इस बार भी वहां एक वार्ड सुरक्षित किया गया है। बावजूद इसके एक बेड पर दो-दो मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण अधिकतर बेड पर दो-दो मरीज लेटे हुए मिले। वही, सोमवार को अवकाश के कारण ओपीडी दोपहर 12 बजे तक होने के बावजूद मरीजों की संख्या काफी रही। जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड का भी यही हाल है। यहां 27 मरीजों को भर्ती करने की क्षमता है, लेकिन करीब 40 मरीज वहां भर्ती किए गए हैं। इस कारण एक बेड पर दो-दो मरीजों को भर्ती कर इलाज चल रहा है।
बुखार से दिव्यांग युवक की मौत
थाना बिशारतगंज के ग्राम जैनपुर कादराबाद के दिव्यांग सुरेश साहू (35)की बुखार से मौत हो गई। उन्हें चार दिन से बुखार आ रहा था। उन्हें सीएचसी मझगवां पर दिखाया गया। बाद में उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया। जहां उपचार के दौरान सोमवार देर शाम उनकी मौत हो गई। सुरेश पर ही पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी। उनकी मौत से परिजन सदमे में हैं।
एसीएमओ बोले, डायरिया से हुई दोनों बच्चों की मौत
फरीदपुर के गांव गौसगंज में दो बच्चों की बुखार से मौत की सूचना पर सोमवार को एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम टीम के साथ गांव पहुंचे। उन्होंने बच्चों की मौत बुखार से होने का खंडन किया। उन्होंने बताया कि बच्चे डायरिया से पीड़ित थे। डायरिया और उसकी वजह से होने वाले कॉम्प्लीकेशन के कारण बच्चों की मौत हुई। उनकी मर्ज की हिस्ट्री देखने पर यह पता चला कि दोनों को उल्टी-दस्त हुए थे। इससे उनके शरीर में पानी की कमी हो गई। घरवाले उन्हें सरकारी अस्पताल ले जाने की बजाय झोलाछाप के पास ले गए। झोलाछाप के इलाज से उनकी हालत खराब हो गई। एक बच्चे ने घर में ही दम तोड़ दिया, दूसरे की जिला अस्पताल पहुंचने पर मौत हो गई।
यह भी पढ़ें : फरीदपुर में संक्रामक रोग की गिरफ्त में लोग, दो बच्चों की मौत : www.jagran.com/uttar-pradesh/bareilly-city-two-children-die-due-to-fever-in-faridpur-many-people-struggling-19482312.html
स्वास्थ्य विभाग ने लगाया कैंप
सोमवार को गांव गौसगंज में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शिविर लगाया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर बासित अली की टीम ने गांव में बुखार से पीड़ित 117 मरीजों के खून की जांच करवाई। उनमें से सिर्फ 17 लोगों में ही मलेरिया (प्लाज्मोडियम वाइवेक्स) की पुष्टि हुई। गांव में सफाई अभियान चलाया गया। कीटनाशक का छिड़काव भी करवाया गया। डॉ. बासित ने बताया कि गांव में कोई महामारी नहीं फैली है। सफाई अभियान चलाए जाने के लिए एडीओ पंचायत से कहा गया है।
दूसरे जिले से आ रहे मरीज बने सिरदर्द
जिला अस्पताल में यहां के मरीजों का ही भार बहुत है, आसपास के जिलों से आने वाले मरीज परेशानी को बढ़ा रहे हैं। पास के जिलों से बिना डॉक्टर के देखे स्टाफ ही मरीजों को रेफर कर दे रहे हैं। ऐसे मरीज भी रेफर कर दिए जा रहे हैं, जिनका वहां आसानी से इलाज हो सकता है। परेशान डॉक्टरों ने एडी हेल्थ से शिकायत की बात कही है। पिछले एक हफ्ते में आसपास के जिलों से ऐसे तमाम मरीज आए हैं, जिनका वहां इलाज हो सकता था। पीलीभीत से मोहम्मद फैज को वहां जिला अस्पताल में सिर्फ दस मिनट में ही यहां के लिए रेफर कर दिया गया।
बदायूं मेडिकल कॉलेज से शिशुपाल को यहां मामूली बीमारी में भेज दिया गया। वहां मेडिकल कॉलेज होने के बावजूद पूरन चंद्र को यहां रेफर किया। बुजुर्ग रामदेवी को सीधे यहां भेज दिया गया। जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. वागीश वैश्य का कहना है कि सबसे अधिक मरीज बदायूं से यहां रेफर होकर आ रहे हैं। ऐसे मरीज जो वही ठीक हो सकते हैं उन्हें भी यहां भेज दिया जा रहा है। इससे यहां मरीजों की संख्या बढ़ रही है। मामले की जानकारी एडी हेल्थ को दी जाएगी।
