बरेली [दीपेंद्र प्रताप सिंह]: कुंभ महोत्सव के दौरान इस बार गंगा का जल आम दिनों की तुलना में ज्यादा साफ था। वजह, योगी सरकार का सख्ती। शासन का स्पष्ट फरमान था कि किसी भी तरह के उद्योगों का प्रदूषित जल गंगा व सहायक नदियों में न पहुंचे। तमाम उद्योगों को समय-समय पर बंद भी रखा गया। परिणाम भी सकारात्मक मिले। अब सरकार ने नया फरमान जारी किया है कि ज्यादा प्रदूषण उत्सर्जित करने वाली फैक्ट्रियों पर वेब कैमरे लगाए जाएं। इनके जरिये प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, लखनऊ स्थित मुख्यालय से सीधे 24 घंटे निगरानी कर सकेगा कि फैक्ट्री में लगा उत्प्रवाह शुद्धिकरण संयंत्र (ईटीपी) सही तरह से काम कर रहा है या नहीं। इस बाबत मुख्य पर्यावरण अधिकारी-वृत्त सात ने मुरादाबाद, बरेली, बिजनौर के क्षेत्रीय अधिकारियों और तमाम जिलों के डीएम को ऐसी 61 फैक्ट्रियों की लिस्ट दी है।

15 दिन में लगाने हैं रोटेशनल पीटीजेड कैमरे

फैक्ट्री वाले दोयम दर्जे के वेब कैमरे नहीं लगा सकेंगे। आदेशों में साफ है कि फैक्ट्रियों में लगाए जाने वाले कैमरे रोटेशनल होंगे। यानी, चारों तरफ मूवमेंट करने वाले। इसके अलावा कैमरों की क्वालिटी भी हाई डेफिनेशन (एचडी) होनी अनिवार्य है। क्षेत्रीय अधिकारी को पत्र मिलने के 15 दिन में ही कैमरे लगाने के आदेश हैं।

इन फैक्ट्रियों पर लगाने हैं कैमरे

उप्र प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने उन फैक्ट्रियों को चिह्नित भी किया है जिनसे ज्यादा प्रदूषित जल उत्प्रवाह होता है। इन्हें ग्रासली पॉल्यूटिंग इंडस्ट्री का नाम दिया है। इसमें शुगर इंडस्ट्री, डिस्टलरी, पेपर मिल, स्लॉटर हाउस और केमिकल इंडस्ट्री हैं। बरेली, शाहजहांपुर, पीलीभीत, मुरादाबाद, रामपुर, सम्भल, बिजनौर, अमरोहा के जिलों में कुल 61 फैक्ट्री हैं।

यूआरएल और पासवर्ड से मुख्यालय करेगा निगरानी

क्षेत्र में आने वाली सभी इंगित फैक्ट्रियों में वेब कैमरे लगवाने के आदेश मुख्यालय से मिले हैं। फैक्ट्री मालिकों को 15 दिनों में बताए कैमरे लगाने को कहा जा रहा है। इसके बाद यूआरएल और पासवर्ड मुख्यालय पर दे दिया जाएगा। जिससे इन फैक्ट्रियों पर 24 घंटे निगरानी रहेगी।

-रोहित सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, यूपी प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड 

Posted By: Abhishek Pandey

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