जेएनएन, बरेली : मैला ढोने वालों को समाज की मुख्य धारा लाने की योजना में भी जिम्मेदारों ने गड़बड़ी की सेंधमारी कर डाली। आर्थिक लाभ दिए जाने के लिए लाभार्थियों की सत्यापन रिपोर्ट में ब्लॉक से ऐसे नाम भी भेज दिए, जो मूल सूची में थे ही नहीं। जिला समाज कल्याण अधिकारी ने जिला पंचायत राज अधिकारी से फिर से सही और स्पष्ट रिपोर्ट मांगी है।

2018 में जिले में अलग-अलग जगह पर पुनर्वास योजना के तहत कैंप लगाए गए थे। इन कैंप में ऐसे लोगों से आवेदन मांगे गए थे, जो हाथ से मैला ढोने का काम छोड़कर मुख्य धारा से जुड़ना चाहते थे। शिविरों के माध्यम से 537 आवेदन आए थे। इसके बाद इन आवेदन का सत्यापन और सर्वेक्षण करने के लिए सूची पंचायत राज विभाग को दी गई थी। अब गड़बड़ी सामने आने पर अब विकास भवन के ही दो विभाग आमने-सामने हैं।

देखें कैसे हुआ कागजों पर खेल : हाल में सत्यापन रिपोर्ट आई। इसमें कई गांव ऐसे थे जहां से उन लोगों के नाम भी थे, जो सूची में ही नहीं थे। ब्लॉक फरीदपुर से 44 स्वच्छकार के नाम भेजे गए। इसमें सात नाम शाहपुर बनियान गांव के लोगों के जोड़े गए। यह पहले की सूची में शामिल ही नहीं थे। रामनगर ब्लॉक में विरमा देवी का नाम अलग से जोड़ दिया गया। यह पहले की सूची में नहीं था। ब्लाक शेरगढ़ में भी अलग से नाम जोड़े भोजीपुरा में तो बिना प्रमाणित फोटो के ही सत्यापन करके नाम भेज दिया। विकास खंड दमखोदा की रिपोर्ट में तो कुछ लोगों के नाम ही बदल दिए गए। सूची में नाम अलग था।

समाज कल्याण विभाग से रिपोर्ट आई है। इसमें जो भी त्रुटि या गड़बड़ी हुई है उसकी जांच कर फिर से रिपोर्ट भेजी जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि इसमें किसकी लापरवाही रही। -धर्मेद्र कुमार, डीपीआरओ

Posted By: Abhishek Pandey

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