जेएनएन, बरेली : महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय एवं सम्बद्ध कॉलेजों से पढ़कर निकल चुके डेढ़ लाख से ज्यादा छात्र-छात्राओं की डिग्रियां लॉकडाउन की वजह से फंस गई हैं। ये छात्र 2018-19 में स्नातक-परास्नातक उत्तीर्ण हुए थे। उम्मीद थी कि अप्रैल में डिग्री मिल जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इसको लेकर कई दिनों से छात्र-छात्राएं चक्कर विश्वविद्यालय के चक्कर लगा रहे। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन प्रोविजनल डिग्री देने की व्यवस्था कर रहा है। यह छह महीने के लिए मान्य होगी।

रुहेलखंड विश्वविद्यालय से 548 कॉलेज जुड़े हैं। हर साल हजारों छात्र यहां से पढ़कर निकलते हैं। वर्ष 2018-19 में एक लाख 60 हजार छात्र-छात्राएं डिग्री पूरी करके निकले। उनकी डिग्री छपाई के लिए विश्वविद्यालय ने फरवरी में दिल्ली की एक फर्म का ठेका दे दिया। दो महीने में डिग्री छप कर आनी थी। लेकिन कोराना की वजह से अब तक डिग्री छप नहीं पाई। यही नहीं, दिल्ली में कोरोना संक्रमण की वजह से हालात अच्छे नहीं हैं। जिस वजह से यह इंतजार लंबा खिंचने के आसार हैं।

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दो जून से मिलेंगे अस्थायी प्रमाण पत्र और प्रोविजनल डिग्री

प्राइमरी स्कूलों में 69,000 सहायक अध्यापक भर्ती के लिए आवेदन करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र की जरूरत है। इसके लिए छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय पहुंच रहे हैं। गुरुवार को परीक्षा नियंत्रक ने उनके अस्थायी प्रमाण पत्र या प्रोविजनल डिग्री देने की तारीख तय कर दी है। दो जून से सिगल विडो से यह सुविधा दी जाएगी।

यह होगी व्यवस्था

दिन जिला

सोमवार, मंगलवार बरेली, पीलीभीत, रामपुर

बुधवार, गुरुवार मुरादाबाद, बिजनौर, सम्भल

शुक्रवार, शनिवार शाहजहांपुर, बदायूं, जेपी नगर

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इंसेट

आंकड़े

कॉलेज की संख्या : 548

2018-19 में डिग्री वालों की संख्या : करीब एक लाख 60 हजार

डिग्री की फीस प्रति छात्र : 300 रुपये

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कोट

लॉकडाउन की वजह से ओरिजनल डिग्री बनने में समय लगेगा। छात्र-छात्राओं को परेशान न होना पड़े, इसके लिए प्रोविजनल डिग्री देने की व्यवस्था की जा रही है।

- संजीव कुमार सिंह, परीक्षा नियंत्रक, रुहेलखंड विवि

Posted By: Jagran

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