बरेली (जेएनएन)। राज्य विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव की सरगर्मी के बीच मंगलवार को गोरखपुर विश्वविद्यालय में जमकर बवाल हो गया। एबीवीपी और लॉ संकाय के छात्रों में मारपीट, लाठीचार्ज के बाद छात्रसंघ चुनाव स्थगित कर दिए गए। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय अब गोरखपुर विवि में हुए बवाल को भुनाने में लग गया। रुविवि का डिपार्टमेंट ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर (डीएसडब्ल्यू) बोर्ड गुरुवार की बैठक में इस मुद्दे पर मंथन करेगा। लिंगदोह समिति की सिफारिशों को सामने रखकर यह तय किया जाएगा कि चुनाव कराना संभव है या नहीं। बीच के रास्ते पर भी चर्चा होगी, जिसमें बिना चुनाव छात्रों में लीडरशिप विकसित करना शामिल है। पिछले दिनों दीक्षा समारोह में आए राज्यपाल रामनाईक से छात्र नेताओं के एक प्रतिनिधि मंडल ने मुलाकात की थी। तब राज्यपाल ने कहा था कि कैंपस में चुनाव होने चाहिए। उनके इस बयान पर छात्र नेताओं में चुनाव की उम्मीद जाग गई। हालांकि, विवि प्रशासन चुनाव के पक्ष में नहीं है। छात्रनेताओं की मांग पर विवि ने शासन से चुनाव के संबंध में दिशा-निर्देश मांगे हैं। डीएसडब्ल्यू प्रोफेसर एके जेटली ने बताया कि गुरुवार को बोर्ड की बैठक में लिंगदोह समिति की सिफारिशों पर चर्चा होगी। इसमें चुनाव पर स्थिति साफ की जाएगी। --छात्रों में नेतृत्व क्षमता जरूरी चुनाव से कतरा रहे विश्वविद्यालय प्रशासन का भी मानना है कि छात्रों में नेतृत्व क्षमता विकसित करना जरूरी है। अगर चुनाव संभव न हुए तो सीधे कक्षाओं से होनहार छात्रों की लीडरशिप तैयार की जा सकती है।

छात्र नेताओं ने नहीं किया दावा

चुनाव की मांग पर विवि ने पिछले दिनों छात्रनेताओं को पत्र जारी कर यह जवाब मांगा था कि कौन-कौन चुनाव के पक्ष में है। विवि का दावा है कि अभी तक एक भी छात्रनेता की ओर से चुनाव कराए जाने का दावा पेश नहीं किया गया है।