जेएनएन, बरेली : इंटरनेट के युग में साहित्य को फायदा, कम नुकसान ज्यादा हो रहा है। लोग किताबों से दूर हो रहे हैं, तब जबकि ज्ञान तो किताबें ही देती हैं। इंटरनेट महज जानकारी के आदान-प्रदान का साधन है। यह बात साहित्यकार महाश्वेता चतुर्वेदी ने जागरण संवाददाता अविनाश चौबे से बातचीत में कही। उनका ¨हदी को लेकर मानना है कि इस भाषा की मजबूती के लिए हीन भावना से पार पाना होगा।

प्रश्न: लोगों का किताबों और साहित्य की ओर रुझान कम होने का कारण क्या मानती हैं?

उत्तर: इसका बड़ा कारण मोबाइल है। किताबें पढ़ने की फुर्सत और जरूरत किसी को नहीं है, क्योंकि मोबाइल पर ही गाना, समाचार, वैज्ञानिक जानकारी, साहित्य आदि सभी कुछ है, लेकिन इसमें काफी कुछ भ्रामक है। सरकारी स्तर पर इस तरह की भ्रामक जानकारी देने वाली साइट पर रोक लगनी चाहिए। पाठ्यक्रम में सांस्कृतिक धरोहर साहित्य को शामिल किया जाना चाहिए। लोगों को समझना होगा कि ज्ञान किताबों से ही मिलता है।

प्रश्न: वर्तमान में जिस तरह का लेखन हो रहा है, उसके संतुष्ट हैं या सुधार की जरूरत महसूस कर रही हैं?

उत्तर: लेखन ऐसा होना चाहिए जो कि समाज को दिशा दे। लेखन की सार्थकता इसी में है। देश में ¨हदी के काफी अच्छे लेखक हैैं। लोग भी उन्हें पढ़ना चाह रहे हैं। इसके विपरीत कुछ भी लिखकर किताब छपवाने की प्रवृत्ति को बदलना होगा।

प्रश्न: वर्तमान में ¨हदी की स्थिति कैसा पा रही हैं। सुधार के लिए क्या किए जाने की जरूरत है?

उत्तर: ¨हदी की दशा और दिशा वर्तमान में बहुत अच्छी है। दुनिया के कई देशों में पाठ्यक्रम बतौर ¨हदी विषय शामिल है। देश में जरूर लोग ¨हदी में बात करने में झिझकते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। सरकार भी ¨हदी भाषी लोगों को नौकरी के साक्षात्कारों में प्राथमिकता दें। ऐसे प्रयासों से हिंदी का मान बढ़ेगा।

प्रश्न: इंटरनेट ¨हदी के उत्थान में कैसे सहायक हो सकता है?

उत्तर: इंटरनेट पर हमारे सभी ग्रंथ भी अपलोड किए जाएं, जिससे युवा भी उनके बारे में जान सके। वैदिक साहित्य की जानकारियां भी मिल सकें। उन्हें इससे आत्मगौरव का अनुभव होगा कि उनका वैदिक साहित्य काफी संपन्न है।

प्रश्न: छोटे-छोटे शहरों में ¨हदी किताबों का मेला लगाने से क्या फायदा मिलेगा?

उत्तर: यह एक बेहतर प्रयास हो सकता है। बशर्ते सरकार प्रकाशकों को सुविधाएं और आर्थिक सहयोग दे। तभी लोगों को अच्छी किताबें कम कीमतों पर पढ़ने को मिलेंगी। प्रकाशक भी छोटे शहरों के मेलों के लिए प्रोत्साहित होंगे।

Posted By: Jagran

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