जागरण संवाददाता, बरेली: बीसलपुर रोड पर दो किलोमीटर के इलाके में ही करीब दर्जन भर से ज्यादा अस्पतालों का मकड़जाल फैला है। हाईवे, भुता व आसपास के अन्य गांवों से आने वाले तमाम मरीजों का यहीं इलाज होता है। खास बात कि अस्पताल के नाम पर चल रहीं अधिकतर दुकानें बुनियादी मानकों पर ही खरी नहीं उतरती हैं। छोटी-छोटी जगह खुले कुछ तथाकथित अस्पतालों में तो इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) नहीं है। ऐसा मानना मुश्किल है कि शहर की सरहद पर चल रहे इन तथाकथित अस्पतालों की जानकारी स्वास्थ्य महकमे या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नहीं है, लेकिन अधिकारी किसी न किसी वजह से जान कर भी अनजान बने हैं। 'ट्रामा का ड्रामा' अभियान की कड़ी में अगली रिपोर्ट..।

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केस एक

एसआर क्रिटिकल केयर अस्पताल एंड ट्रामा सेंटर

डीजी अस्पताल से कुछ ही दूरी पर एसआर क्रिटिकल केयर अस्पताल एंड ट्रामा सेंटर बना है। यहां मुख्य द्वार से अंदर ही खुले में ईटीपी बना था। हालांकि ट्रामा सेंटर के लायक बुनियादी कोई सुविधा यहां नहीं थी। जैसे यहां स्टाफ ने एक ओटी बताई, लेकिन बाद में पहुंचे हास्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन ने बताया दो आपरेशन थिएटर हैं। इसके अलावा यहां न्यूरो, पेट या हड्डी के सर्जन बुलाने की व्यवस्था केवल आन कॉल ही थी।

केस दो

पूनम हास्पिटल एंड मैटरनिटी सेंटर

बीसलपुर रोड पर यूनिवर्सिटी गेट के सामने मौजूद पूनम हास्पिटल एंड मैटरनिटी सेंटर में ईटीपी ही नहीं था। जागरण संवाददाता के पूछने पर अस्पताल प्रशासन ने कहा कि चार बेड के अस्पताल में ईटीपी की जरूरत नहीं होती। अस्पताल प्रशासन ने उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी रोहित सिंह के डिजिटल साइन वाली कापी भी दिखाई। हालांकि अस्पताल चेक किया तो यहां चार से ज्यादा बेड पड़े हुए थे। यानी अस्पताल प्रशासन ने बिस्तर कम दिखाए हुए थे।

केस तीन

अभिराम हास्पिटल

निर्माणाधीन जैसे हालात में बने अभिराम अस्पताल के हाल भी अजब थे। यहां डाक्टर के नाम पर कोई मौजूद नहीं था। लंबे समय से चल रहे अस्पताल के बाहर ईटीपी का सेटअप महज दिखावे के लिए लगा था। आसपास इंजेक्शन, सिरिज आदि भी खुले में पड़ी थीं। अस्पताल के पंजीकरण संबंधी दस्तावेज भी स्टाफ नहीं दिखा सका।

केस चार

डीजी अस्पताल

हरूनगला सब स्टेशन के पास बने डीजी अस्पताल में स्टाफ इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट नहीं दिखा सका। अस्पताल में आने-जाने का रास्ता भी केवल एक ही था, वो भी काफी संकरा। यानी, आपात स्थिति में यहां से मरीज या स्टाफ के निकलने की जगह ही नहीं थी। ऐसे में इस अस्पताल को अनुमति कैसे मिली, ये बड़ा सवाल है।

एक्सपर्ट कमेटी के बिना मिले अप्रूवल

ट्रामा सेंटर को अप्रूवल एक्सपर्ट कमेटी के बिना मिलने से बड़े सवाल खड़े होते हैं। इसके अलावा अस्पतालों में ट्रामा सेंटर से जुड़े कई मानक पूरे नहीं मिले। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से भी इन पर कोई कार्रवाई न होने से कई सवाल खड़े होते हैं।

दर्पिन एवं अपैक्स हास्पिटल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की संस्तुति

जासं, बरेली: कोविड संक्रमण जैसे आपदा के समय भी अस्पतालों की लापरवाही पर अब प्रशासन कड़ी कार्रवाई के मूड में है। शहर निवासी हरीश कुमार गुप्ता का दर्पिन एवं अपैक्स हास्पिटल में संक्रमण ग्रसित होने के बाद उपचार चल रहा था। यहां उनकी मौत के बाद स्वजन ने अस्पताल प्रशासन पर कोविड प्रोटोकाल के तहत शव उनके सुपुर्द न करने, लापरवाही की वजह से शव बदलने और विरोध पर दु‌र्व्यवहार करने का आरोप लगाया था। एसडीएम सदर विशु राजा ने मामले की जांच की थी, जिसमें आरोप सही पाए हैं। साथ ही दोषियों के खिलाफ आपदा एवं महामारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराने की संस्तुति की है। आयुक्त के पास भी रिपोर्ट पहुंची है। इसके बाद आयुक्त ने जिलाधिकारी से संस्तुति के आधार पर सप्ताह भर में कार्रवाई को कहा है।

Edited By: Jagran