बरेली, जेएनएन : वीर शहीद अब्दुल हमीद की ग्रेनेडियर रेजीमेंट के हवलदार महमूद ने ऑपरेशन बजरंग में अपना शौर्य दिखाया था। असम में उल्फा उग्रवादियों के साथ आंतरिक युद्ध में महमूद और उनके साथियों ने कई उग्रवादियों को मार गिराया था और कुछ को पकड़ कर बंदी बनाया था। बेस्ट स्टूडेंट ऑफ इंडियन आर्मी रहे महमूद को वीर शहीद अब्दुल हमीद की रिक्वायर लेस गन चलाने में महारत हासिल है। जिसके लिए वह आर्मी में बतौर आरसीएल इंस्टेक्टर पहचाने जाते है।

इज्जतनगर क्षेत्र में स्थित कंजादासपुर गांव से निकले पहले फौजी महमूद खान कहते है कि उन्हें गर्व है कि वह वीर शहीद अब्दुल हमीद की 4 ग्रेनेडियर रेजीमेंट के जवान रहे है। जबकि उनकी तैनाती 20 ग्रेनेडियर रेजीमेंट में रही। उन्होंने बताया कि असम में जब यूनियन लीड फ्रंट ऑफ एसोसिएशन यानि उल्फा का आतंक बढ़ा तो असम में वर्ष 1991-94 के बीच उनकी तैनाती तिनसुकिया में थी। असम में इन उग्रवादियों के सफाये के लिए ऑपरेशन बजरंग चलाया गया था। जिसके दौरान उन्हें तैनात किया गया था।

सिर पर काला कपड़ा बांध कर जब वह अपने साथियों के साथ निकले तो सिर्फ एक मकसद था कि दुश्मन पर विजय पाना। महमूद ने बताया कि कई बार उग्रवादियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाते वक्त ऐसी स्थिति भी हुई, कि मौत सामने से गुजर गई। तीन साल उनकी तैनाती असम में रही। 1984 से 90 के बीच वह छमजोडियां, अखनूर, राजौरी, मेंढर में तैनात रहे है। उन्होंने बताया कि जिस समय उनकी वहां पर तैनाती रही, उस समय वहां ऐसा माहौल नहीं था। जो इस समय जम्मू और कश्मीर के हालात है।

समाज सेवा मंच ने झंडे बांटकर मनाया जश्न
जश्न ए आजादी की पूर्व संध्या पर समाज सेवा मंच की ओर से पूर्व घोषित एक जश्न एवं झंडा वितरण का कार्यक्रम अध्यक्ष नदीम शमसी की अध्यक्षता में अयूब खां चौराहा पर धूमधाम से मनाया गया। कार्यRम में नदीम शमसी ने बताया कि आज भारत की जो उम्दा तस्वीर उभर कर आई है पाकिस्तान उससे बौखला गया है। पाकिस्तान आज काला दिवस मना रहा है। उन्होंने बताया कि मंच के सभी लोग जश्न मना रहे हैं।

 

Posted By: Abhishek Pandey