बरेली, जागरण संवाददाता।  आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष प्रतिपदा 30 जून से 8 जुलाई तक गुप्त नवरात्रि मनाई जाएगी। गुप्त नवरात्रि का महत्व बासंतीय एवं शारदीय नवरात्रि से ज्यादा होता है। साथ ही आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि का तंत्र, मंत्र और सिद्धिसाधना के लिए विशेष महत्व माना गया है। गुप्त नवरात्रि में मां भगवती का आगमन ध्रुव योग में और प्रस्थान शिव-सिद्धि योग में होगा। शास्त्रों के अनुसार जो भी गुप्त नवरात्रि में मां भगवती की साधना करते हैं, उन्हें ग्रह दोष, रोग और सभी बाधाओं से मुक्ति मिलती है और संपन्नता सरलता से प्राप्त हो जाती है।

ज्योतिषाचार्य पंडित मुकेश मिश्रा ने बताया कि ध्रुव योग से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत और शिव, सिद्धि योग में मां का प्रस्थान, यह संयोग श्रद्धालुओं के लिए बेहद ही लाभदायक है। इस बार नवरात्रि में गुरु-पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग जैसे कई सारे शुभ योगों का नवरात्रि में आना बेहद शुभ संयोग है। उन्होंने बताया कि जो भी इस बार नवरात्रि में व्रत पूजन उपासना करेगा, उनके सभी बिगड़े कार्य बनेंगे और जीवन मंगलमय होगा। नौ दिनों तक सुबह स्नान करने के बाद मां भगवती के सामने दीप प्रज्वलित करें और मंत्रों का जाप कर दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। लक्ष्मी प्राप्ति के लिए कमल, पुष्प प्रतिदिन चढ़ाएं। जिन कन्याओं के विवाह में अड़चन आ रही है वह कन्याएं मां भगवती को शृंगार अर्पित करें। गुप्त नवरात्रि में मां भगवती की पूजा उपासना भी गुप्त ही करनी चाहिए।

गुप्त नवरात्रि घटस्थापना शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त - 30 जून , सुबह 11 बजकर 57 से 12 बजकर 53 मिनट तक।

घट स्थापना मुहूर्त - 30 जून 2022, सुबह 5 बजकर 26 मिनट से 6 बजकर 43 मिनट तक।

Edited By: Vivek Bajpai