बरेली (जेएनएन): सैलानी मुहल्ले में एक कमरे का घर। बड़े करीने से उसमें पूरी गृहस्थी का सामान सजा। बच्चे बेड पर लेटे टीवी देख रहे हैं और मोनी जरी का अड्डा लगाए कढ़ाई में व्यस्त हैं। दोपहरी के तीन बजे हम उनके घर पहुंचे। जरी पर बात शुरू ही हुई कि दरवाजे के ऊपर से निकली बिजली की केबिल जलने लगी। कमरे में अंधेरा छा गया। बच्चे हड़बड़ाए। पंद्रह मिनट तक केबिल जलने-बुझने का क्रम बना रहा। बाद में शौहर आए तो केबिल काटी।

तब दोबारा मोनी से जरी पर बात शुरू हुई। वह बताती हैं कि मैं बचपन से यही काम करती हूं। दस साल पहले काम बहुत अच्छा था। एक दिन में 250 रुपये कमा लेते थे। अब तीन-चार दिन में एक सूट तैयार होता है। उसके 300 रुपये मिलते हैं। शौहर मुहम्मद शान खान भी जरी के कारीगर हैं। दोनों मिलकर कमाते हैं फिर भी घर का खर्च मुश्किल से चलता है। मोनी बताती हैं कि अब तो काम ही नहीं मिलता है। कभी-कभार ही काम आता, वह भी दूसरे की शर्त पर करना पड़ता है। कारीगर ज्यादा, काम कम

मुहम्मद शान खान बताते हैं कि अब जरी के कारीगर ज्यादा हैं और काम कम। कारीगरों को जितने रुपये में जो काम मिल जाता, मजबूरी में करना पड़ता। क्योंकि इसके सिवा कोई दूसरा काम नहीं आता है। साल में तीन महीना काम चलता है। जरी का यह सीजन चल रहा है। इस समय मुश्किल से महीने में 2500 रुपये कमा पाते हैं। काम का भुगतान भी अटकने लगा

इमरान खान दिल्ली और पंजाब से जरी का काम लाते हैं। इनके अधीन सात कारीगर हैं। इमरान बताते हैं कि पहले मालिक हर पंद्रह दिन में भुगतान कर देते थे। अब दो-ढाई महीना टालते हैं। अपने पास से कारीगरों को मेहनताना देना पड़ रहा है। 25 साल पहले नहीं थे ऐसे हालात

-सैलानी के इंतजार खान 25 साल से जरी का काम कर रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई-शादी सब जरी के काम से किया। पर अब घर का खर्च चलाने के लाले हैं। जरी के काम में मंदी के लिए कंप्यूटराइज्ड कढ़ाई और जीएसटी को वजह मानते हैं। कम दिहाड़ी पर भी काम तो मिले

इम्तियाज का मानना है कि काम लगातार मिलता रहे तो कम दिहाड़ी में भी खर्च चल जाएगा। मगर अब तो काम ही नहीं मिलता है। कारीगरों की मजदूरी 100 से 125 रुपये मुश्किल से मिल रही है। डेढ़ लाख कारीगर

जिले में जरी के डेढ़ लाख कारीगर हैं। एक जनपद, एक उत्पाद से इनकी जिंदगी बेहतर बनने की उम्मीद है। कारीगर भी उत्साहित हैं। वह कहते हैं कि काम के लिए रुपये मिल जाएं तो हालात बेहतर हो जाएंगे।

By Jagran