बरेली (जेएनएन)। झांसी के जिलाधिकारी शिव सहाय अवस्थी और संभल के जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक (पीडी) हरेंद्र कुमार सिंह को एससी-एसटी कोर्ट ने तलब किया है। वे बतौर मुल्जिम हाजिरी देने पहुंचेंगे। यह मामला एपीओ को मानदेय दिलाने की बजाय जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल और धमकी देने के आरोप से जुड़ा है। कोर्ट ने दोनों अफसरों को समन भेजकर 25 सिंतबर को हाजिर होने के आदेश दिए हैं।

दरअसल, बरेली में तैनाती के दौरान शिव सहाय अवस्थी सीडीओ और हरेंद्र कुमार सिंह मनरेगा के डीसी पद पर कार्यरत थे। अधिवक्ता गौरव सिंह ने एडीजे द्वितीय-विशेष न्यायधीश एससी एसटी एक्ट रवि नाथ की अदालत में उनके खिलाफ परिवाद दाखिल किया। इसमें बताया कि उनकी बहन गरिमा सिंह संयुक्त विकास आयुक्त कार्यालय बरेली में अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी थी। जिसे सात मई 2012 से मानदेय नहीं मिल रहा था।

शासन व प्रशासन से शिकायत करने के बाद भी कोई राहत नहीं मिली तो हाईकोर्ट में याचिका दायर की। जिस पर आदेश हक में आए लेकिन अफसरों ने सुनवाई नहीं की। अवमानना दायर करने पर सीडीओ शिव सहाय अवस्थी ने अपूर्ण मानदेय भुगतान कराया। इसकी शिकायत करने जब दोनों भाई-बहन 23 मई 2015 को उनके चैंबर में पहुंचे तो वहां पहले से डीसी हरेंद्र कुमार भी मौजूद थे।

आरोप है कि दोनों अफसरों ने जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल करके भाई-बहन को अपमानित किया। जान से मारने की धमकी देकर चैंबर से निकाल दिया। शिकायत के बाद भी जब पुलिस ने सुनवाई नहीं की तो कोर्ट में परिवाद दाखिल किया।

 

Posted By: Ashish Mishra

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