अंकित शुक्ला, बरेली । कोरोना का खौफ लोगों में इस समय इतना है कि लोग लिफ्ट मांगने वालों को लिफ्ट देने की जगह दूर हट जा कोरोना है.. कहते हुए आगे बढ़ जा रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान जहां पूरे भारत में रेल और बस सेवा बंद कर दी गई है। वहां मजबूरन घर से निकलने वालों को कोई भी लिफ्ट नहीं दे रहा है। लोगों को अपनी मंजिल तक पैदल ही जाना पड़ रहा है। शहर के जंक्शन, रोडवेज बस अड्डे से पैदल अपनी मंजिल तक लोग आते-जाते देखे जा सकते हैं। ऐसे में अगर किसी ने बाइक वाले से लिफ्ट मांग ली तो भी कोई पसीज नहीं रहा। बाइक या कार वाले लोग लिफ्ट देने की जगह कोरोना का भय बताते हुए मुस्कुरा कर निकल जा रहे हैं। कुछ लोगों पर कोरोना वायरस का डर इतना है कि पास बैठना तो दूर साथ में खड़े होने से भी गुरेज कर रहे हैं। 

इस समय घर में रहना भी देश सेवा है

रेलवे ने 14 अप्रैल तक अपनी सभी यात्री ट्रेनों को कोरोना वायरस के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए निरस्त कर दिया है। ट्रेनें निरस्त होने पर कई अधिकारियों, कर्मचारियों को छुट्टी भी मिल गई है। काफी अरसे के बाद इतनी लंबी छुट्टी के बावजूद लॉकडाउन के चलते लोग घर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। पहले तक पूरे स्टेशन परिसर में घूमकर अपना रौब गांठने वाले अधिकारी भी इन दिनों घरों में हैं। फोन कीजिए तो इनके मुंह से कोई और बात ही नहीं, बस यही निकलता है कि ऐसी छुट्टी भी किस काम की। हालांकि तुरंत की कहीं बात पकड़ न ली जाए, संभल जाते हैं। कहने लगते हैं कि अब देश की बात है इसलिए घर में सुरक्षित रहना ही सबसे बेहतर कदम है। देश के लिए इतना तो कर ही सकते हैं। एक अफसर कहते हैं कि घर पर रहना ही देश सेवा मान रहा हूं।

कोरोना ने तोड़ दी साहबों की जोड़ी

तहसीलों, सर्किल क्षेत्रों में हमेशा एक साथ एक गाड़ी में चलने वाले साहब कोरोना के डर से इन दिनों अलग हो गए हैं। कोरोना ने इन साहबों की जोड़ी तोड़ दी है। कोरोना के खतरे को देखते हुए अब साहब अलग-अलग हो गए हैं। न तो साथ में कहीं आ रहे हैं, न ही जा रहे हैं। निरीक्षण, छापेमारी के अलावा किसी जरूरी काम में अगर अब जाना भी पड़ रहा है तो दोनों साहब अपनी-अपनी गाड़ी से और उचित दूरी बनाए दिखाई दे रहे हैं। जबकि अभी तक दोनों साहब एक ही गाड़ी से अधिकांश समय एक साथ दिखाई देते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं है। दोनों साहब अपनी-अपनी बातें आमने-सामने करने की जगह फोन पर ही करना उचित समझ रहे हैं। एक जगह साथ में निरीक्षण के लिए जाना था। तब भी दोनों ने अपनी-अपनी गाड़ी का इस्तेमाल किया। पहले प्रशासनिक और बाद में पुलिस वाले साहब पहुंचे।

..कोऊ के न लागूं पांय

कोरोना वायरस का संक्रमण और न फैले, इसे लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अपनी चरण वंदना कराने के शौकीन लोगों ने भी इन दिनों पैर छुआने बंद कर दिए हैं। इसकी जगह अब केवल प्रणाम और नमस्कार से ही काम चल रहा है। पहले तो इनके पास जैसे ही कोई पहुंचता था, साहब अपना पैर उसकी ओर घूमा देते थे। पीएम मोदी ने 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा की तो ऐसे साहबों ने पैर छूने वालों से दूरी बना ली। हमेशा अपनी चरण वंदना कराने को आतुर लोगों में एक साहब पिछले दिनों डेलापीर मंडी परिषद पहुंचे। जहां लोग उनकी हमेशा की तरह चरण वंदना करने दौड़े। हर बार अपना पैर उनकी ओर करने वाले साहब आगे की जगह पीछे की ओर हटते दिखाई दिए। हटने के तुरंत बाद सभी को नसीहत करते हुए जागरूक रहने को भी कह दिया।

 

Posted By: Ravi Mishra

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