Bareilly का IVRI बना देश का 'टॉप एजुकेशनल ब्रांड': A++ ग्रेड मिलने के बाद अब छात्रों के लिए होगा खास आकर्षण
बरेली स्थित IVRI (भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान) को NAAC द्वारा A++ ग्रेड मिलने के बाद देश का 'टॉप एजुकेशनल ब्रांड' घोषित किया गया है। इस उपलब् ...और पढ़ें
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आइवीआरआइ
जागरण संवाददाता, बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आइवीआरआइ) को बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। संस्थान को नैक के मूल्यांकन में ए-प्लस प्लस का सर्वोच्च ग्रेड मिला है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) के इस महत्वपूर्ण संस्थान को उसके समग्र प्रदर्शन, शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान में नवाचार और बुनियादी ढांचों के लिए यह मान्यता प्रदान की गई है, जो पांच वर्षों के लिए बनी रहेगी।
आइवीआरआइ ए-प्लस प्लस ग्रेड से मान्यता प्राप्त करने वाला भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के डीम्ड विश्वविद्यालयों में पहला संस्थान भी बन गया है। इससे संस्थान को बड़ा लाभ यह मिलेगा कि उसे शोध कार्यों के लिए अनुदान पाना और आसान हो जाएगा, जिससे वह शोध कार्यों को गति देने में आसानी होगी। इसके साथ ही वह नए कोर्सों की शुरुआत, शोध में और ज्यादा गुणवत्तापरक कार्य, विदेशी फैकल्टी का सहयोग सहित अन्य कठिन रास्ते भी संस्थान के लिए सुगम हो जाएंगे।
राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद (नैक) के द्वारा एक प्लस-प्लस ग्रेड दिया जाना संस्थान के प्रत्येक वैज्ञानिक, शिक्षकों, छात्राओं और प्रशासनिक कर्मचारियों के लिए उल्लेखनीय प्रगति मानी जा रही है। नैक की टीम ने इसी साल दो से जून तक आइवीआरआइ में निरीक्षण कर सात बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार की थी।
इस दौरान देखा गया कि संस्थान के पास शोध कार्यों के लिए संसाधनों की क्या स्थिति है, शैक्षणिक ढांचा कैसा है, प्रशासनिक कार्यों और प्रगति की क्या हालत है। इसी तरह टीम ने कुल सात बिंदुओं को पूरा करते हुए रिपोर्ट तैयारी की। मूल्यांकन के इस पैरामीटर पर आइवीआरआइ काफी खरा उतरा और उसे चार में से 3.58 का असाधारण स्कोर प्राप्त हुआ है।
इससे संस्थान स्थिति देश के शीर्ष शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थाओं में काफी मजबूत हुई है। नैक का यह मूल्यांकन वर्ष 2018 से 2023 तक पांच साल के गहनता से किए गए परीक्षण के बाद सामने आया है। आइवीआरआइ के अधिकारियों का कहना है कि यह मूल्यांकन किसी भी उच्च शिक्षा संस्थान के लिए उत्कृष्टता का प्रमाण है और इससे उसे कई बड़े लाभ मिलते हैं। संस्थान के निदेशक डा. त्रिवेणी दत्त का कहना है कि यह मूल्यांकन प्राथमिक तौर से शैक्षणिक स्वयत्तता भी प्रदान करता है।
आनलाइन नए कोर्स शुरू करना और अनुदान के रास्ते हुए आसान
नैक के मूल्यांकन में एक प्लस-प्लस मिलने के बाद आइवीआरआइ के लिए नए रास्ते खुल गए हैं। इससे संस्थान आनलाइन लाइन कोर्स और आधुनिक पाठ्यक्रमों को तेजी से शुरू कर सकता है। यह सर्वोच्च ग्रेडिंग यूजीसी जैसे निकायों से पर्याप्त सरकारी वित्तपोषण और अनुदान प्रदान करने की पात्रता को काफी बढ़ा देता है, जिससे आवश्यक वित्तीय संसाधन की जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सकता है।
इसके अलावा इस ग्रेडिंग के मिलने के बाद विश्व स्तर पर शोध और शिक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, विदेशी से मिलनी वाली आर्थिक मदद सहित दूसरी सुविधाओं को प्राप्त करने मेंं ज्यादा सहायक होगी। इसके अलावा महत्वपूर्ण बात यह भी है कि संस्थान को ए-प्लस प्लस का दर्जा मिलना यहां छात्रों को अध्ययन के लिए काफी आकर्षित करेगा, क्योंकि यह भावी छात्रों को उच्च शैक्षणिक मानकों, योग्य संकाय और बेहतर प्लेसमेंट के अवसरों को काफी बढ़ावा देने वाला है।
संस्थान हर साल जारी करता 350 से ज्यादा शोधपत्र
आइवीआरआइ हर साल 350 से ज्यादा शोधपत्र जारी करता है। संस्थान की स्थापना वर्ष 1889 में हुई थी। निदेशक डा. त्रिवेणी दत्त ने बताया कि संस्थान तब से लेकर अब तक भारत की पशुधन अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा है।
संस्थान को नैक से मिला ए-प्लस प्लस ग्रेड इस बात का प्रमाण है कि संस्थान न केवल अपने इतिहास को संजोता है, बल्कि भविष्य के लिए भी नवाचार कर रहा है। संस्थान अब तक तमाम महत्वपूर्ण अध्ययनों के जरिये तमाम महत्वपूर्ण शोध कर चुका है। कोशिश की जा रही है कि आने वाले दिनों में शोध के जरिये संस्थान और भी अधिक उल्लेखनीय प्रयास करे।
यह केवल एक ग्रेड नहीं है, बल्कि पशु चिकित्सा विज्ञान में वैश्विक मानकों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि है। हम सरकार और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के आभारी हैं, जिन्होंने हमें लगातार समर्थन दिया। यह मील का पत्थर हमें देश की खाद्य सुरक्षा और पशुधन समृद्धि को सुनिश्चित करने के लिए और अधिक परिश्रम करने के लिए प्रेरित करेगा। हमारा लक्ष्य आइवीआरआइ को पशु चिकित्सा अनुसंधान और शिक्षा में विश्व के शीर्ष संस्थानों में स्थापित करना है। ए-प्लस-प्लस ग्रेड प्राप्त करने के बाद संस्थान स्थिरता बनाए रखने और निरंतर सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। यह उपलब्धि न केवल संस्थान के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय पशु चिकित्सा और कृषि समुदाय के लिए एक प्रेरणा है। संस्थान देश के पशुधन क्षेत्र को एक नए मुकाम पर ले जाने के लिए तैयार है।
-डा. त्रिवेणीदत्त, निदेशक, आइवीआरआइ

इस असाधारण सफलता का श्रेय निदेशक के अनुकरणीय नेतृत्व, सावधानीपूर्वक समन्वय प्रयासों, आइक्यूएसी समन्वयक डा. मनीष महावर और एसोसिएट नोडल अधिकारी डा. मधु सीएल की समर्पित मेहनत और सभी समिति अध्यक्षों तथा सदस्यों के सामूहिक योगदान को जाता है। यह गौरवपूर्ण उपलब्धि आइवीआरआइ के 135 साल से अधिक के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ती है, जो देश में पशु स्वास्थ्य, पशुधन उत्पादन और जैव सुरक्षा के क्षेत्र में इसके समर्पण और नेतृत्व को प्रमाणित करती है। नैक का मूल्यांकन एक कठोर और व्यापक प्रक्रिया है, जो उच्च शिक्षा संस्थानों को सात महत्वपूर्ण मानदंडों पर परखती है। आइसीएआर-आइवीआरआइ ने इन सभी मानदंडों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जो संस्थान की बहुआयामी क्षमता को दर्शाता है।
-डा. एसके मेंदीरत्ता, संयुक्त निदेशक शैक्षणिक, आइवीआरआइ

आइवीआरआइ को नैक में ए-प्लस प्लस की ग्रेडिंग मिलना काफी महत्वपूर्ण और उल्लेखनीय है। इससे संस्थान की छवि राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काफी बेहतर हुई है। इसके बाद संस्थान में शोध कार्यों को और अधिक गति मिलेगी, जिसका सीधा लाभ वैज्ञानिकों के साथ छात्रों को भी मिलेगा। इस उपलब्धि के लिए सभी विभागाध्यक्षों के लगाकर विज्ञानियों और छात्रों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है। चूंकि संस्थान पहले भी शोध के क्षेत्र में आगे रहा है और अब राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय योगदान और अनुदान से उसकी प्रगति और भी ज्यादा बेहतर स्थिति में पहुंचेंगी, ऐसी संभावना काफी बढ़ गई है।
-डा. मधू सी.एल. विज्ञानी, आइवीआरआइ

किसी भी उच्च संस्थान के लिए नैक की ए-प्लस-प्लस ग्रेडिंग मिलना काफी बड़ी उपलब्धि है। यह ग्रेडिंग मिलना ही किसी संस्थान की उत्कृष्ट गुणवत्ता का बड़ा प्रमाण है। यह कई बड़े लाभों को सुनिश्चित करता है। यह नैक की सर्वोच्च ग्रेडिंग है, जिसे प्राप्त करना किसी संस्थान के लिए काफी गौरवान्वित करने वाला है। इससे वैश्विक स्तर पर अनुसंधान और शिक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और विदेशी फंडिंग को आकर्षित करता है। यह उपलब्धि संस्थान को यूजीसी से अनुदान प्राप्त कराने और उसकी शैक्षिक गुणवत्ता को और अधिक सुधार करने में काफी सहायक होती है। खास बात ये है कि आइवीआरआइ पहली बार नैक के मूल्यांकन में शामिल हुआ और सर्वोच्च ग्रेडिंग की मान्यता प्राप्त करने में सफल रहा है।
-डा. ज्ञानेंद्र सिंह, एकेडमिक कोआर्डिनेटर, आइवीआरआइ
इन सात बिंदुओं पर आधारित होता नैक का मूल्यांकन
- पाठ्यक्रम के पहलू : संस्थान द्वारा चलाए जा रहे गुणवत्तापूर्ण स्नातक, स्नातकोत्तर और डाक्टरेट कार्यक्रमों का मूल्यांकन।
- शिक्षण और मूल्यांकन : अत्याधुनिक शिक्षण पद्धतियां और छात्रों के मूल्यांकन की निष्पक्ष प्रणाली।
- अनुसंधान, नवाचार और विस्तार : पेटेंट, प्रकाशन और समाज पर अनुसंधान के प्रभाव।
- बुनियादी ढांचा और सीखने के संसाधन : उन्नत प्रयोगशालाएं, समृद्ध पुस्तकालय और आधुनिक पशु प्रक्षेत्र।
- छात्र सहायता और प्रगति : छात्रों को प्रदान की गई फेलोशिप, प्लेसमेंट और परामर्श सेवाएं।
- शासन, नेतृत्व और प्रबंधन : पारदर्शी और प्रभावी प्रशासनिक ढांचा और वित्तीय प्रबंधन।
- संस्थागत मूल्य और सर्वोत्तम अभ्यास : पर्यावरणीय चेतना, सामाजिक जिम्मेदारी और नैतिक आचरण।


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