जेएनएन, बरेली: बरेली: जोगी नवादा में ऐतिहासिक दंगल का शनिवार को आगाज तिरंगे के अपमान से हुआ। अखाड़े मे लगाए गए झंडा के बीच तिरंगे को कपड़े की तरह बांध दिया। दंगल में पहलवान भिड़ते रहे और दर्शक मजे लेते रहे। तिरंगे के अपमान की तरफ आयोजकों का भी ध्यान नहीं गया। बाद में जब इसका अहसास हुआ तो आनन-फानन में तिरंगा हटवाया और अपनी भूल स्वीकार की।

बाबा श्री वनखंडी नाथ मंदिर के मैदान में अव्यवस्थाओं के बीच दंगल का आगाज हुआ। शाम चार बजे अखाड़ा पूजन हुआ, जिसके बाद यहां झंडा लगा, जो कि पहली कुश्ती शुरु होने से ठीक पहले लगा। इसके बीच में ही तिरंगा कपड़े की तरह बंधा हुआ था, जिस पर किसी का भी ध्यान नहीं गया। फिर यहां लगातार कुश्तियां होती रही। पहलवान एक दूसरे को चित्त करने के दांव खेलते रहे, लेकिन किसी का भी ध्यान तिरंगे की तरफ नहीं गया। दंगल देखने का एकत्रित दर्शकों का ध्यान पहलवानों के दांवपेंच पर ही रहा। 

 दंगल संचालक ब्रहमचारी उर्फ टीनू पहलवान का कहना है कि अखाड़ा पूजन के बाद झंडा मंगाया था। जल्दबाजी में झंडा के साथ ही तिरंगा भी बंधा आ गया। पिछले दिनों हुई बारिश से दंगल की तैयारियां काफी प्रभावित हुई, जिससे यह भूल हो गई। दंगल के बाद जब इस तरफ ध्यान गया, तो तत्काल तिरंगा को सम्मानपूर्वक हटवाया गया।

 

Posted By: Abhishek Pandey

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