बरेली, जेएनएन। रियायती दरों पर बटने वाले गरीबों के अनाज पर अपात्रों का कब्जा है। सदर तहसील की ग्राम पंचायतों में जारी राशनकार्डों में यही खेल हो गया। बड़े पैमाने पर अपात्रों को राशन कार्ड बिना सत्यापन के जारी हुए। गड़बड़झाला पकड़ने के बाद ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ईशान प्रताप सिंह ने जांच बैठा दी। अप्रैल और मई में जारी होने वाले 22 हजार नए राशन कार्ड अब जांच के घेरे में आ चुके हैं।

कोरोना वायरस का संक्रमण शुरू होने के बाद सरकार का फोकस गरीबों के घर राशन पहुंचाने पर था। इसीलिए गृहस्थी कार्ड और अंत्योदय कार्ड वाले करीब 8 लाख लोगों को रियायत दर पर गेहूं, चावल, दाल और मुक्त चना बांटा जा रहा। गड़बड़ी की शुरुआत भी यहीं से हुई। सभी को राशन मिले, इसके लिए राशन कार्ड बनाने में नरमी बरती जाने लगी। फायदा गांव के प्रधान और सचिव ने उठाया। धड़ल्ले से राशन कार्ड जारी करवाए गए। पात्रों को राशन नहीं मिलने पर शिकायत हुई। शुरुआती जांच में सामने आया कि पूरा मामला आगामी प्रधानी चुनाव से जुड़ा हुआ है। वोट बैंक की राजनीति में अपात्रोंं के राशन कार्ड भी बनवा दिए गए।

मकान, दुकान वाले मांग चुके हैं मुफ्त राशन: दो मंजिला मकान और दुकान वाले इससे पहले कंट्रोल रूम में फोन करके मुफ्त गल्ला मांग चुके हैं। सदर तहसील कि इन मामलों में जांच के बाद नोटिस जारी करवाए गए थे। अब गलत तरीके से राशन कार्ड जारी करने के मामले सामने आए हैं।

अधिकारी की बात अपात्रों को राशन कार्ड जारी किए जाने की बात सामने आई है। मैंने पूरे मामले की जांच करवाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। अपात्र का राशन कार्ड हटेगा, तभी एक पात्र व्यक्ति को राशन मिल सकेगा। - ईशान प्रताप सिंह ज्वाइंट मजिस्ट्रेट 

Posted By: Ravi Mishra

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