जेएनएन, बरेली : पुलिस की सेवा। हर समय सतर्क, 24 घंटे पूरी ऊर्जा से मुस्तैद रहने की चुनौती। यह बिना बेहतर फिटनेस के मुमकिन नहीं। लेकिन, एक अदद सरकारी नौकरी की चाह में मैनेजमेंट, बीएड, इंजीनियरिंग किए युवा भी सिपाही बनने कतार में लगे हैं। बिना शारीरिक फिटनेस और प्रैक्टिस के ही। नतीजा दौड़ पूरी होने से पहले ही कदम लड़खड़ा रहे। बुधवार को पीएसी मैदान में महिला अभ्यर्थी की मौत ने इस सच से पर्दा उठाया।

परीक्षा पास की, प्रैक्टिस बिना उतरे मैदान में: यह भर्ती 2018 में निकली थी। 2019 में लिखित परीक्षा पास करने वालों की 28 दिसंबर से दौड़ कराई जा रही है। अब तक 10 हजार 500 अभ्यर्थी भाग ले चुके हैं। दौड़ के प्रारंभिक बैच में एक या दो अभ्यर्थी ही होते थे जो बीच रास्ते गिरते या घायल हो जाते थे। एक सप्ताह से कई अभ्यर्थी ऐसे आ रहे।

प्रैक्टिस न होने से मैदान पर लड़खड़ा रहे अभ्यर्थी : जानकार बताते हैं कि बाद में मेरिट गिरने के बाद अभ्यर्थी शामिल हुए। प्रैक्टिस न होने से यह मैदान पर लड़खड़ा रहे हैं। ग्लूकोज की कमी से थकान आती है। सफलता हा‍सि‍ल करने के लिए एक दम से शारीरिक मेहनत करते है। और ग्लूकोज की अनदेखी करते है। जिसके परिणाम स्वरुप जल्द लडखड़ा जाते है। 

ग्लूकोज की कमी से जल्द थकान : भर्ती बोर्ड में शामिल चिकित्सक डॉ. जितेंद्र सिंह बताते हैं दौड़ के दौरान अधिकतर अभ्यर्थी थकान की वजह से गिरते हैं। ग्लूकोज की कमी होने के चलते अभ्यर्थियों को परेशानी होती है। सबसे ज्यादा परेशान वह होते हैं जो बिना प्रैक्टिस के सीधे दौड़ करने आ रहे हैं।

गिरने वाले अधिकतर लोग वही रहे, जिनकी प्रैक्टिस नियमित नहीं थी। शुरुआती दिनों में ऐसे मामले एक-दो ही थे। अब जिनकी दौड़ चल रही है वह मेरिट गिरने से शामिल हुए हैं। - सीमा यादव, सीओ तृतीय/ सदस्य भर्ती पैनल

 

 

Posted By: Abhishek Pandey

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस