बरेली, जेएनएन। कोरोना संक्रमण से ज्यादा उन्हें भूखे मरने का डर था। शायद यही वजह रही कि धूप - आंधी, बरसात में सैकड़ों से हजारों किलोमीटर का सफर पैदल ही तय करना शुरू किया। दावा था कि बसों और ट्रेनों से प्रवासियों को पहुंचाया जा रहा। कोशिश दिख भी रही लेकिन घर- परिवार छोड़कर बाहर नौकरी- मजदूरी कर रहे लोगों की तादाद के आगे सुविधाएं नाकाफी दिखी। प्रवासी रुकने को राजी नहीं थे।

औरैया हादसे के बाद पुलिस प्रशासन और सजग हुआ। एडीजी अविनाश चंद्र से लेकर प्रशासनिक अधिकारी तक सड़कों पर प्रवासियों की खोज -खबर लेने पहुंचे। हादसे के बाद कहा गया था कि प्रवासियों को सुरक्षित सफर के लिए बसों में ही बैठाया जाए। लेकिन सीमित संसाधनों के बीच लोडर, पिकअप और बंद गाड़ियों तक में प्रवासियों को भेजना मजबूरी बन गया। दैनिक जागरण ने हाईवे पर लाइव हाल देखने के साथ प्रवासियों को लेकर अलग-अलग हालात का जायजा लिया।

क्या करें साहब..... घर ना पहुंचे तो मर जाएंगे

क्या करें साहब..... मजबूर हैं, घर नहीं पहुंचे तो मर जाएंगे। लॉकडाउन में मजदूरी नहीं मिल रही है, जो कुछ जोड़ा था सब खत्म हो गया है। शनिवार को पैदल सफर करते हुए जनपद में दाखिल हुए अधिकतर प्रवासियों के यही शब्द थे। सभी की बस एक ही चाह कि किसी तरह घर पहुंच जाएं।

दोपहर के 2:00 बज रहे थे। चिलचिलाती धूप के साथ तेज लू चल रही थी। इसी बीच जीरो पॉइंट पर अपने सिर पर सामान रखे दिल्ली से रूपेश, राकेश, अवधेश, उमेश, रामेंद्र, अनूप समेत उनके दर्जनभर साथी पैदल ही बिहार के भागलपुर के लिए चल रहे थे। उन्होंने बताया कि दिल्ली में रहकर एक निजी फैक्ट्री में काम करते हैं। लॉकडाउन के बाद न तो मालिक ने साथ दिया और न ही सरकार ने। जमा पूंजी खत्म हो गई।

भुखमरी की नौबत आई तो घर वापस जाने के अलावा दूसरा कोई उपाय नहीं था। 3 दिन पहले दिल्ली से पैदल ही बिहार की ओर चल दिए बीच में कहीं पर पुलिस वालों ने खाना खिलाया तो कहीं स्थानीय लोगों ने। यह प्रवासी जब परसाखेड़ा पर जीरो पॉइंट पर पहुंचे तो वहां मौजूद पुलिस ने सभी को खाना खिला लखनऊ जा रही है एक गाड़ी में बिठाया।

जीरो पॉइंट पर उतारकर जा रहे वाहन

दिल्ली से आ रही कई गाड़ियां बदायूं जाने वाले लोगों को जीरो पॉइंट पर ही उतार कर चली जा रही हैं। जहां से बदायूं जाने की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे ही एक प्रवासी मजदूर नेम चंद्रा परिवार के साथ चंडीगढ़ से बदायूं जाने भी निकल पड़ा। बीच-बीच में पैदल और गाड़ियों की मदद से वह परसा खेड़ा के जीरो पॉइंट पहुंचा। आगे का सफर पैदल ही तय हो रहा था। पूछने पर बताया कि चंडीगढ़ की एक फैक्ट्री में काम करते हैं। लॉक डाउन में फैक्ट्री बंद हो गई तो अपने गांव की ओर जा रही हैं।

उत्तराखंड के लिए चल दिए पैदल

उत्तराखंड के सात लोग हाथरस की एक कोल्ड स्टोर में पल्लेदार करते थे उत्तराखंड के खटीमा निवासी प्रभात जोशी आसिफ राजा दिनेश सोनू जोशी कमल संजीव मेहता ने बताया कि हाथरस से 35 किलोमीटर पैदल चलने पर पुलिस ने एक वाहन पर बैठाया जिसने 30 किलोमीटर बाद उतार दिया फिर पैदल सफर किया शनिवार को शाहजहांपुर पहुंचे जहां से फिर पैदल रास्ते में पुलिस ने रोका नहीं ना कुछ पूछा और ना ही मदद की संजीव के पैरों में छाले तक पड़ गए।

Posted By: Ravi Mishra

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