बरेली, अभिषेक पांडेय: मुश्किलें हजार तो सामना करने के लिए हाथ असंख्य हैं। इन्हीं में एक कोशिश होटल मालिक की ओर से हो रही, जोकि होम आइसोलेट मरीजों के लिए खाना पहुंचा रहे। लागत कहें या बर्बादी रोकने के लिए अन्न का मोल, उन्होंने इसकी कीमत 30 रुपये तय की है। खाने की गुणवत्ता वही, जो अपने होटल के लोगों को देते थे।
जंक्शन पर होटल चलाने वाले करन सिंह बग्गा कहते हैं कि पिछले सप्ताह उन लोगों पर ध्यान गया, जो संक्रमण की चपेट में आकर घरों में कैद होने को मजबूर हो गए। कोई अकेला नौकरपेशा अकेला फंस गया तो किसी के पूरे परिवार संक्रमित हो गए। भोजन का संकट खड़ा होने लगा। उन लोगों के लिए मैंने घर तक भोजन पहुंचाने की तैयारी की। कोरोना के कारण होटल की रसोई ठंडी पड़ चुकी थी। स्टाफ को चिंता थी कि नौकरी पर संकट न आ जाए। मैंने उन्हीं लोगों को इस काम में जुटा दिया।
अभी रोजाना 150 आर्डर
23 अप्रैल से उन्होंने होम आइसोलेट मरीजों के लिए यह सुविधा शुरू कर दी। कीमत तय की-30 रुपये। चार तवा रोटी, दो तंदूरी रोटी, दाल, सब्जी, चावल, अचार थाली में पैक कराकर भेजना शुरू कर दिया। करन कहते हैं कि इस कीमत को चाहें लागत समझ लीजिए या अन्न का मोल। निश्शुल्क भोजन में बर्बादी की आशंका दूर करने के लिए यह मोल लेना उचित लगा। अभी इंटरनेट मीडिया के जरिये अपना फोन नंबर वायरल किया है। उसी से पहले दिन 45 और दूसरे दिन 125 लोगों के आर्डर पहुंचाए। होम आइसोलेशन में होने की पुष्टि करने के लिए लोगों ने अपनी कोविड रिपोर्ट वाट्सएप पर भेजनी शुरू की। प्रतिदिन 150 आर्डर तक भेजे जा सकते हैं।
मदद और रोजगार भी
करन राशन का इंतजाम कर रहे। उनके होटल की रसोई का स्टाफ अब काम में व्यस्त हो गया, रोजगार बचा हुआ है। होम डिलीवरी के लिए उन्होंने चार लड़के रखे हैं। ये चारों एक कंपनी में आनलाइन फूड डिलीवरी करते थे, मगर इन दिनों काम ठप हो गया था। यही अब होम आइसोलेशन वाले मरीजों के लिए भोजन पहुंचा रहे। चार्ज के नाम पर एक गली या रूट के चार आर्डर ले जाते हैं तो उनसे कुल मिलाकर 50 रुपये लेते हैं। अलग-अलग और दूरी होने पर प्रत्येक से 30 रुपये लेते हैं।
टेंट लगाकर खाना बनाएंगे, नहीं होने देंगे कमी
जिले में इस वक्त तीन हजार से ज्यादा संक्रमितों का घरों में इलाज चल रहा है। करन कहते हैं कि हमारी रसोई और स्टाफ की क्षमता दिन में अधिकतम 150 थाली तैयार करने की है। लेकिन, हालात देख लग रहा कि इससे ज्यादा लोगों को मदद की जरूरत है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए कुछ दोस्तों से बात कर रहे हैं। जरूरत पड़ी तो टेंट लगवाकर हलवाई लगा देंगे, मगर किसी के भोजन की कमी नहीं होने देंगे। करन ने पिछले साल ही जयपुर से बीटेक की पढ़ाई की है। इसके बाद होटल संभालने लगे।
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