बरेली, जेएनएन। Hindi Diwas 2021: पुलिस वाले की तो नौकरी होती है जिसकी वो ड्यूटी निभाता है, उसका परिवार बिना नौकरी के ड्यूटी निभाता है। शनिवार-इतवार आते ही हर बच्चा माता-पिता के साथ वीकेंड मनाने जाता है, पुलिस वाले का बच्चा पिता के थके होने के कारण अपनी इच्छा भी नहीं कह पाता है..। पुलिस और उसके परिवार के मर्म की यह रचना है मधुरिमा अग्रवाल की। हिंदी साहित्य की सेवा में जुटी मधुरिमा अग्रवाल की रचनाओं में पुलिस और उसके परिवार की दिनचर्या और चुनौतियों का सजीव चित्रण देखने को मिलता है।

बात हिंदी दिवस की हो और हिंदी साहित्य की सेवा में जुटे रचनाकारों की न हो, ऐसा कहां संभव है। हिंदी साहित्य की सेवा में जुटी मधुरिमा अग्रवाल भी उन्हीं रचनाकारों में एक हैं। पद्य विधा में लिखने वाली मधुरिमा अग्रवाल मूलरूप से इलाहाबाद के नैनी की रहने वाली हैं। उनके पति राजकुमार अग्रवाल बरेली में एसपी देहात के पद पर कार्यरत हैं। मधुरिमा के लेखन क्षेेत्र में आने की कहानी भी रोचक है।

बताती हैं कि शुरू से ही पुलिस परिवार का हिस्सा रही। पिता आइपीएस थे। शादी भी पुलिस परिवार में हुई। लिहाजा, एक पुलिसकर्मी के जीवन को बेहद करीब से परिचित थी। इसी के बाद लिखना शुरू किया। रचना का केंद्र बिंदु चुना पुलिस और उसका परिवार। पहली रचना लिखने के बाद जब उनका उत्साहवर्धन हुआ तो उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और हिंदी साहित्य की सेवा में जुट गईं। अब तक वह कई रचनाएं लिख चुकी हैं। पुलिस के अलावा उनकी रचनाओं में प्रकृति प्रेम व समसामयिक मुद्दे भी झलकते हैं।

 

Edited By: Ravi Mishra