जागरण संवाददाता, बरेली : दो दिन से आसमान में छाई ये धुंध वाहनों के धुएं और धूल से मिलकर बनी है, इसलिए यह हानिकारक है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि तापमान में अधिक वृद्धि से मौसम शुष्क हो गया है। वातावरण में कम दबाव का क्षेत्र बन गया है। नतीजतन, जमीन में सूख चुके मिट्टी के कण हवा के साथ उड़कर आसमान में छा गए हैं। इनके साथ वाहनों के प्रदूषण का धुआं भी हवा में उड़कर मिल गया है। इससे ये धुंध बन गई है।

पर्यावरणविदों का कहना है कि अब जब तक बारिश नहीं होती या फिर तेज आंधी नहीं आती, ये धुंध ऐसे ही छाई रहेगी। चिकित्सकों का कहना है कि इस धुंध में धूल-गर्द के साथ कार्बन डाई ऑक्साइड वाले घातक तत्व समाहित हैं, ऐसे में यह सांस के रोगियों और बच्चों के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने इससे बचाव के लिए बाहर निकलने में खासतौर पर सावधानी बरतने की सलाह दी है। धुएं में घुले हैं कार्बन

पर्यावरणविद और बरेली कॉलेज में बॉटनी डिपार्टमेंट के प्रभारी डॉ. आलोक खरे का कहना है कि ये धुंध राजस्थान से भी आई है और इसका स्थानीय प्रभाव भी है। वह बताते हैं कि जब तापमान अधिक बढ़ जाता है और बारिश नहीं होती है तो मिट्टी की ऊपरी परत ढीली पड़ जाती है। ये जरा सी हवा में भी उड़ने लगती है। इसी तरह वाहनों से निकलने वाला प्रदूषित धुंआ मौसम में नमी होने पर पेड़ों और उनके पत्तों पर छा जाता है लेकिन चूंकि मौसम इन दिनों ड्राई है इसलिए धुंए में घुले कार्बन पर्टिकल हवा में उड़कर धूल के साथ वातावरण में छा गए हैं।

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इसीलिए ज्यादा है गर्मी

बरेली कॉलेज में पाल्यूशन मानीट¨रग सेंटर के कोआर्डिनेटर डॉ. डीके सक्सेना बताते हैं कि वातावरण में छाई धूल और वाहनों के धुएं की वजह से जमीन पर पड़ने वाला सूरज का रेडिएशन वापस आसमान में नहीं जा पा रहा है। नतीजतन, उमस और गर्मी बेतहाशा है। डॉ. सक्सेना का कहना है कि धुंध की वजह से वातावरण में कार्बन पर्टिकल बढ़ गए हैं। इसकी मॉनीट¨रग की जा रही है।

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बढ़ गई बीमारियां

जनरल फिजीशियन डॉ. सुरेश सोंधी बताते हैं कि दो दिन से छाई धुंध की वजह से सांस और अस्थमा रोगियों को काफी दिक्कत हो रही है। इसी तरह लोग लू और डायरिया का शिकार हो रहे हैं। क्लीनिकों पर दवा लेने के लिए ऐसे रोगियों की संख्या पिछले दो दिन में बढ़ी है। डॉ. सोंधी बताते हैं कि इस माहौल में खासतौर पर बच्चों और बढ़े-बुजुर्गो को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। इंसेट..

कैसे बरतें सावधानी-

-घर से बाहर गमछे से मुंह ढककर निकलें।

-बुजुर्ग और बच्चों को जहां तक संभव हो, खासतौर पर दोपहर में घर से बाहर न निकलने दें।

-खानपान में विशेष सावधानी बरतें। बाहरी चीजें, जो ढककर न रखी गई हों, बिल्कुल न खाएं।

-जितना संभव हो स्वच्छ पानी पीएं।

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साइड स्टोरी..

..और अभी बारिश के लिए करना होगा इंतजार

-शरीर को झुलसा रही सामान्य हवा, घर में भी उमस

जागरण संवाददाता, बरेली : धुंध और गर्मी से गुरुवार को हर कोई बेहाल नजर आया। धुंध के बीच चल रही हवा हालांकि सामान्य थी लेकिन ये इतनी गर्म थी कि शरीर को झुलसा रही थी।

वहीं, जो मौसम विज्ञानी कभी भी बारिश और आंधी का अनुमान लगाए हुए थे, वे बदले वातावरण में साफ नहीं कर पा रहे हैं कि कब तक झमाझम बारिश होगी। एक दिन पहले तापमान 41.9 डिग्री सेल्सियस था, जो गुरुवार को घटकर 38.2 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग ने अधिकतम आ‌र्द्रता 62 फीसदी और न्यूनतम आद्रता 33 फीसदी रिकॉर्ड किया है। मौसम विभाग बारिश और आंधी आने को लेकर अभी कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है। वहीं, पंतनगर स्थित पंडित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की मौसम विज्ञानशाला के प्रभारी डॉ. एचएस कुशवाहा का कहना है कि पहाड़ से सटे मैदानी क्षेत्रों में बारिश कभी भी संभव है, क्योंकि उत्तराखंड में बादल छाए हुए हैं और बारिश हो रही है लेकिन पिछले दिनों जिस तरह से हवाओं के रख में बदलाव हुआ, उससे यह पक्का नहीं कहा जा सकता कि बारिश कब होगी। डॉ. कुशवाहा का भी कहना है कि यह धुंध राजस्थान से आई है।

Posted By: Jagran