अंकित गुप्ता,बरेली : टेरर फंडिंग के आरोप में शुक्रवार को लखीमपुर खीरी में पकड़े गए आरोपितों ने जिस सदाकत का नाम लिया, वह मदद के नाम पर बेरोजगार के खाते खुलवाता था। उनके एटीएम कार्ड अपने पास रखकर कह देता था जब भी किसी काम के लिए रुपयों की जरूरत हो तो आ जाना। खाते के बारे में जानकारी मांगने पर मुंह बंद रखने को हिदायत देता।

15 साल पहले सदाकत चप्पल कारीगर 

सदाकत का घर इज्जतनगर के परतापुर चौधरी गांव में है। वह फरार है। गांव के लोगों ने बताया कि 15 साल पहले सदाकत चप्पल कारीगर था। पिछले कुछ सालों से उसका रहन-सहन बदलता गया। ईंट-भट्ठा खरीद लिया, कोठी बनवा ली। कार से घूमने लगा।

दर्जनों एटीएम कार्ड कार में पड़े रहते 

गांव वालों की मानें तो सदाकत के पास कई एटीएम कार्ड रहते थे, जिन्हें वह अपने घर में और कार में ही रखता था। जिन लोगों ने उसके कहे पर खाते खुलवाए, अब वे डरे हुए हैं। इनमें से करीब एक दर्जन युवक घर छोड़कर रिश्तेदारी में चले गए हैं। पहले शुक्रवार और फिर शनिवार को एटीएस, पुलिस सदाकत के घर पहुंची। वहां महिलाएं और बच्चों ही थे जिनसे कोई खास जानकारी नहीं मिली। उसका गायब होना, उसका फोन बंद जाना, बेरोजगारों के खाते खुलवाना, ये सब इस प्रकरण की अहम कड़ी माना जा रहा। पुलिस मान रही कि उसका कॉल रिकार्ड कई साक्ष्य दे सकता है।

 सर्विलांस और साइबर सेल काम कर रही है। टेरर फंडिंग मामले की जांच एटीएस लखनऊ कर रही है। उनका सहयोग किया जा रहा है। उनकी ओर से मांगी गई जानकारी दी जा रही है। शीघ्र ही आरोपित पकड़ में होगा।-शैलेष पांडेय, एसएसपी

Posted By: Abhishek Pandey

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