बरेली, जेएनएन। Goodbye 2021 : वर्ष 2021 कोरोना संक्रमण की गिरफ्त में जकड़ा रहा। आखिर के कुछ महीने थोड़ी राहत जरूर मिली। लेकिन, कोरोना ने जहां आम जन के स्वास्थ्य को झंझोरा वही चिकित्सा-स्वास्थ्य की दिशा में क्रांति भी लिख गया। इलाज के नए तरीके शुरू हो गए। इसके साथ ही दूरस्थ रहकर भी विशेषज्ञ, डाक्टरों ने सेमिनार किए और प्रशिक्षण भी लिया। इससे स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार का बड़ा जरिया मिला। बीते वर्ष में शुरू हुआ यह तरीका आने वाले वर्ष में भी मरीजों के साथ ही चिकित्सा जगत से जुड़े लोगों के लिए लाभदायक साबित होगा।

टेलीमेडिसिन के जरिए मरीजों को मिला इलाजः कोरोना के दौरान जब घर से निकलना भी मुश्किल था, वह मरीजों के लिए बेहद खराब दौर था। अस्पतालों में डाक्टर भी नहीं बैठ रहे थे। उस वक्त तमाम डाक्टरों ने टेलीमेडिसिन का सहारा लिया। डाक्टरों ने फोन पर ही मरीजों की समस्या को सुनकर, देखकर उन्हें दवाएं लिखीं। कोविड मरीजों को प्रोटोकाल के हिसाब से दवाएं दीं। उन्हें जरूरत पड़ने पर अस्पताल तक में मदद की। कोविड काल के दौरान लगातार मरीजों के संपर्क में बने रहे।

आनलाइन होने लगीं अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंसः कोविड काल के दौरान जिले में आनलाइन कांफ्रेंस होनी शुरू हुई। जूम एप, गूगल मीट समेत अन्य तरीकों से वर्चुअल तौर पर चिकित्सा जगत के धुरंधर जुटने लगे। तमाम अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय सेमिनार, कांफ्रेंस से शहर के डाक्टर घर बैठे ही जुड़ने लगे हैं। इसी तरह शोध, चिकित्सा के छात्रों को पठन-पाठन के साथ ही प्रशिक्षण भी आनलाइन माध्यम से ही मिलने लगा है। इससे उनके समय में बचत के साथ ही जेब पर पड़ने वाला भार भी कम हुआ है।

घर बैठे दवा मंगाना भी सीखें लोगः कोरोना के दौरान बाजार में सिर्फ दवा की दुकानों पर भी भीड़ लगी दिखाई देती थी। घर से दवा लेने के निकलने पर भी लोगों में घबराहट रहती। ऐसे में आनलाइन दवा का कारोबार भी तेजी से उभरा। तमाम दवा कंपनियों ने आनलाइन दवाओं की बिक्री शुरू कर दी। तमाम आफर के साथ ही छूट भी दी। विपत्ति में लोगों ने आनलाइन दवा मंगाना भी सीख लिया। आज लोग घर बैठे आसानी से दवा मंगा रहे हैं।

एसआरएमएस के मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डा. एमपी रावल ने बताया कि कोरोना काल के दौरान वीडियो कालिंग से मरीज देखे। फिर व्हाट्स-एप पर उन्हें दवा लिखकर दी। अपने शहर में ही नहीं अन्य शहरों के तमाम लोगों को भी देखा। जरूरत पड़ने पर उन्हें भर्ती कराने में भी सहयोग किया। आज भी लोग वैक्सीनेशन समेत अन्य जरूरत के बारे में फोन करते हैं।

सांस एवं गहन चिकित्सा रोग विभाग के अध्यक्ष डा. ललित सिंह ने बताया कि पहली बार ऐसा हुआ कि शहर से ही आनलाइन अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस आयोजित की गई। इसमें कई देशों के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने तमाम जानकारियां साझा कीं। तमाम छात्र-छात्राओं को आनलाइन ही प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कोरोना ने आम इंसान के साथ ही डाक्टरों की आदत सुधारी है।

आइएमए के पूर्व अध्यक्ष डा. रवीश अग्रवाल ने बताया कि कोविड काल के दौरान तमाम लोगों को फोन पर ही इलाज दिया। उस वक्त आनलाइन माध्यम से ही कोरोना में होने वाले अपडेट और चिकित्सा जगह से आ रही गाइडलाइन के हिसाब से मरीजों को देखा। आज भी कई लोगों के फोन स्वास्थ्य से संबंधित आ जाते हैं।

Edited By: Samanvay Pandey