जासं, बरेली : बंदरों से परेशान लोग अपने ही घरों में अनचाही कैद में हैं। गली से लेकर छत तक इनके उत्पात और सामान के नुकसान करने से परेशान हैं। इनसे निजात मिलने की उम्मीद नहीं है। वन विभाग खुद ही तीन साल से हाथ पर हाथ धरे बैठा है। 2015 के बाद से कोई अभियान तक नहीं चलाया गया। जबकि परेशान लोग विभाग से लेकर नगर निगम तक में गुहार लगा रहे हैं।

तीन साल पहले पकड़े थे 500 बंदर

वन विभाग ने आखिरी बार 2015 में अभियान चलाया था। तब 500 बंदर पकड़े गए थे, जिन्हें पीलीभीत के जंगलों में छुड़वाया था। हालांकि निगम ने 1000 बंदर पकड़ने को कहा था। अब एक बार फिर से नगर निगम ने 1500 बंदरों को पकड़ने के लिए वन विभाग को मांग भेजी है। वन विभाग का तर्क है कि बंदर पकड़ने के लिए उत्तर प्रदेश वन्यजीव वार्डन को अनुमति देने के लिए पत्र लिखा है। इस अनुमति के बिना कार्रवाई नहीं की जा सकती।

उत्पात आधे शहर में, खूंखार सिर्फ 70

वन विभाग बंदरों पर मेहरबान है। आधे से ज्यादा शहर में बंदरों का आतंक है। हैरत की बात, तीन साल से कोई अभियान न चलाने वाले वन विभाग ने कागजों में ही खूंखार बंदरों की पहचान तक कर डाली। विभाग की नजर में शहर में 70 बंदर ही खूंखार हैं।

वर्जन..

विभाग ने शहर में 70 खूंखार बंदरों को चिह्नित किया है। इन्हें पकड़वाया जाएगा। इससे पूर्व 2015 में 500 बंदरों को पकड़वाया था।

- भारत लाल, डीएफओ

बोले लोग

बंदरों से परेशान हैं। पिछले दिनों वन विभाग के अधिकारियों का घेराव भी किया गया था। केवल 70 बंदर किस पैमाने से चिह्नित किए। अधिकारियों की लापरवाही से लोग खौफ में हैं।

- राजकुमार राजपूत, जिलाध्यक्ष, व्यापार मंडल

शहर में हजारों बंदर लोगों का जीना मुहाल किए हुए हैं और वन विभाग मात्र 70 बंदरों को खूंखार बता रहा है। यह तो एक तरह का मजाक है।

- दानिश खान

Posted By: Jagran