जागरण संवाददाता, बरेली : सियासत का मैदान और खिलाड़ी भी वही हैं। अगर सेक्युलर मोर्चा को छोड़ दें तो नाम के आगे समाजवादी शब्द भी जाना-पहचाना है। पैड में रंग भी पुराना ही लाल और हरा इस्तेमाल हुआ है। बस उसमें गहरा पीला बढ़ाया है। जिलाध्यक्ष यादव और महानगर अध्यक्ष पद मुस्लिम को दिया है। सबसे खास यह कि सेक्युलर मोर्चा की निगाहें उसी बेस वोट पर हैं, जिसे समाजवादी पार्टी अपना कहती है। जाहिर सी बात कुनबे में बंटवारे के बाद लड़ी जाने वाली सियासी जंग दिलचस्प होगी।

पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह के सेक्युलर मोर्चा ने शनिवार को जिला और महानगर अध्यक्ष का एलान किया तो इरादे साफ हो गए। फोकस पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को अपनी तरफ खींचने पर है। ये दोनों पदों पर चेहरों के चयन से साफ हो रहा है। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष रहे वीरपाल सिंह यादव सेक्युलर मोर्चा में शामिल होने के बाद कह चुके हैं कि पुराने सपाई सब हमारे साथ आएंगे। उन्होंने दो पूर्व विधायकों के जल्द शामिल होने की बात कही है। दोनों मुस्लिम हैं। उनका तर्क है कि अभी तीन दिन हुए हैं, हम सियासी ताकत में सपा से आगे खड़े हैं। हमारे पास एक नगर पालिका परिषद अध्यक्ष भी हैं। दरअसल, वीरपाल 26 साल तक सपा में असरदार तरीके से रहे हैं। उन्हें पार्टी के तमाम पैतरे पता हैं। कमजोरी और मजबूती से वाकिफ हैं। वह सपा में तोड़फोड़ करने के लिए जीजान से जुट गए हैं। दूसरी तरफ वीरपाल सिंह की बगावत को हलके में ले रही समाजवादी पार्टी के पदाधिकारी भी अब हरकत में आ गए हैं। सपा में टूट-फूट रोकने के लिए फील्डिंग सजाई गई है। जो जा चुके हैं, उनसे भी बात हो रही है। सबसे बड़ी चुनौती लोकसभा चुनाव के दौरान बेस वोट में सेंध लगने से बचाने की है। अब कौन कितना कामयाब होगा, यह आने वाला वाला वक्त बताएगा।

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