जेएनएन, बरेली : लकी हत्याकांड की कई परतें खुलनी अभी बाकी हैं। पूरे मामले में थाना पुलिस संदेह के घेरे में है। छह अक्टूबर जब लकी की बाइक बरामद हुई तब उसे देखकर स्पष्ट कहा जा सकता था कि वह चोरी या लूट की है। आरोपितों ने बाइक का स्वरूप ही बदल दिया था, जिससे वह पहचानी न जा सके। इसके बाद भी पुलिस के कान खड़े क्यों नहीं हुए? यह लकी के परिजनों के साथ उसे जानने वाले अन्य लोगों के लिए भी सवाल बना हुआ है। परिजन आरोपितों के जेल जाने से संतुष्ट हैं लेकिन अधूरा राजफाश उन्हें परेशान कर रहा है।

डीआइजी से फिर मिलने पहुंचे लकी के पिता 

लकी के परिजन बुधवार को डीआइजी राजेश पांडेय के कार्यालय पहुंचे। मुलाकात नहीं हो सकी। हाथ में बेटे की मौत का पूरी तरह राजफाश कराए जाने का पत्र था। उम्मीद थाना पुलिस से नहीं बल्कि बेटे के हत्यारोपितों को सलाखों के पीछे भेजने वाली क्राइम ब्रांच से थी। लकी के पिता विनीत बाजपेई बोले कि वह बार-बार पुलिस से कहते रहे कि इन दोनों को पता है कि उनका बेटा कहां है, लेकिन पुलिस ने उनसे पूछताछ करने के बजाए छोड़ दिया। बताया कि दोबारा जांच होगी तो संदिग्ध पुलिस कर्मियों के साथ ही बेटे की हत्या में शामिल अन्य आरोपित भी सामने आएंगे।

अभी बरामद नहीं हो सका लकी का मोबाइल

 लकी के गायब होने बाद से उसका मोबाइल बंद जा रहा था जिसे अभी तक बरामद नहीं किया जा सका। हत्यारोपित गगन और दीपक मोबाइल को शव के साथ फेंकने की बात कह रहे हैं, लेकिन मोबाइल का न मिलना कुछ और ही इशारा कर रहा है। लकी के परिजनों को आशंका है कि गगन और दीपक को पहली बार उठाए जाने के दौरान दारोगा ने जो मोबाइल बरामद किए थे, उनमें ही लकी का मोबाइल हो सकता है।

 

Posted By: Abhishek Pandey

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