बरेली, जेएनएन। वाहनों से मानकों के अनुरूप ही धुआं निकल रहा है या नहीं, इसे जांचने के लिए परिवहन विभाग ने कुछ साल पहले प्रदूषण जांच मशीन खरीदी थी। लेकिन हजारों रुपये की लागत से खरीदी गईं ये मशीनें लंबे समय से खराब पड़ी हैैं। कबाड़ में तब्दील इन मशीनों को ठीक नहीं कराया जा सका। ऐसे में परिवहन विभाग के अधिकारी फिटनेस के समय केवल मैन्युअली ही वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण चेक कर रहे हैैं। वहीं, सड़क पर दौडऩे वाले वाहनों से कितना प्रदूषण निकल रहा, इसका भी औचक निरीक्षण नहीं हो पा रहा है। 

प्रदूषण जांच केंद्रों के भरोसे ही विभाग

जिले में वाहनों का पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (पीयूसी) सर्टिफिकेट बनाने के लिए प्रदूषण जांच केंद्र है। ये सभी निजी केंद्र होते हैैं, जिनमें ऑनलाइन सिस्टम से प्रदूषण चेक किया जाता है। अगर प्रदूषण मानक से ज्यादा है तो सर्टिफिकेट नहीं दिए जाने का प्रावधान है। ऐसे में परिवहन विभाग केवल इन जांच केंद्रों के भरोसे ही रहता है।

गड़बड़ी की कई बार मिली है शिकायत 

प्रदूषण जांच केंद्र निजी लोगों के हाथ में होता है। ऐसे में कई बार बिना जांच के ही प्रदूषण अंडर कंट्रोल का सर्टिफिकेट दिए जाने की शिकायत परिवहन विभाग को मिलती थी। देश भर में ऐसे सैकड़ों मामले सामने आए हैं। इसके बाद सिस्टम ऑनलाइन किया गया। हालांकि अभी प्रदूषण जांच केंद्रों में गड़बड़ी की शिकायत अक्‍सर सामने आ जाती हैं। 

कोरोना को बढ़ावा दे सकता है प्रदूषण 

डॉ.वागीश वैश्य बताते हैंं कि वाहनों से निकलने वाला धुआं वैसे ही पर्यावरण को जहरीला बनाता है। जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो जाता है। इसके अलावा वर्तमान हालात में प्रदूषण कोरोना संक्रमण को भी बढ़ावा दे सकता है। क्योंकि धुआं सीधे फेफड़ों में जाएगा। चूंकि कोरोना भी फेफड़ों में ही संक्रमण पहुंचाता है। ऐसे में दिक्कत बढ़ सकती है। 

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