बरेली, जागरण संवाददाता।  कैंट क्षेत्र में स्थित धोपेश्वरनाथ मंदिर द्रौपदी के गुरू धूम ऋषि की तपोभूमि भी है। उन्होंने द्वापर युग में यहां तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया था। उन्होंने यहां शिवलिंग की स्थापना भी की थी। तभी से इसका नाम धोपेश्वरनाथ पड़ गया। उनके प्राण त्यागने के कुछ वर्षों बाद यह मंदिर धोपेश्वर नाथ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। कई श्रद्धालु इसे धोपा मंदिर के नाम से भी जानते हैं। 

मंदिर की मान्यता: मंदिर के मुख्य पुजारी देवकीनंदन जोशी ने बताया कि मंदिर में शिव चालीसा पूजन करने से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। लेकिन, मान्यता है कि चालीसा के आखिरी सोमवार को क्यारा स्थित गोपालासिद्ध बाबा के मंदिर में पूजन करने पर ही श्रद्धालुओं की चालीसा पूरी होती है।

मंदिर की विशेषता: मंदिर में बना सरोवर श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है। इसकी विशेषता यह है कि इसमें स्नान करने से एलर्जी की बीमारी खत्म हो जाती है। पुजारी ने बताया कि अवध के नवाब शुजाउद्दौला की बेगम के संतान न होने पर उन्होंने यहां मन्नत मांगी थी। उनकी मनोकामना पूरी होने के बाद नवाब ने ही सरोवर के किनारे बनी कच्ची सीढ़ियों को पक्का कराया था।

कैसे पहुंचें मंदिर: धोपेश्वरनाथ पहुंचने के लिए बरेली आकर आटो व रिक्शा के सहारे भी यहां पहुंच सकते हैं। इसके अलावा निजी वाहन से भी सदर बाजार होते हुए मंदिर पहुंच सकते हैं। यदि आप ट्रेन से धोपेश्‍वर नाथ मंदिर पहुंचना चाहते हैं तो बरेली जंक्‍शन पर उतरकर आटो करके मंंदिर पहुंच सकते हैं।

Edited By: Vivek Bajpai