जागरण संवाददाता, बरेली : फीस, किताबों और ड्रेस के नाम पर सीबीएसई और आइसीएसई के स्कूलों के प्रबंधन की मनमानी अब उन्हीं पर भारी पड़ती दिख रही है। शासन की ओर से निजी स्कूलों में फीस निर्धारण के लिए मानक तय करने के बाद प्रशासन और शिक्षा महकमे के अफसरों ने स्कूलों के लिए नियमों के पालन की हिदायत दे दी है।

शासनादेश का पालन करके फीस निर्धारण के लिए संयुक्त शिक्षा निदेशक ने सभी सीबीएसई और आइसीएसई स्कूलों के प्रबंधन को सरकुलर जारी किया है। स्कूल प्रबंधन से कहा गया है कि वे फीस स्ट्रक्चर अपनी वेबसाइट पर अपलोड करें फीस में पारदर्शिता रहे। इससे अब तक मनमानी फीस वसूलते आ रहे कई स्कूलों के प्रबंधन को कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है। कमिश्नर, डीएम और शिक्षा विभाग के अफसरों ने स्कूल प्रबंधकों को मनमानी फीस वसूलने और निर्धारित दुकान से यूनिफार्म और किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों को बाध्य करने पर भी कार्रवाई के लिए चेता दिया है। स्कूलों के प्रबंधन की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए मंडलीय शुल्क नियामक समिति और जिला स्तर पर भी समिति का गठन किया गया है।

फीस स्ट्रक्चर वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश

संयुक्त शिक्षा निदेशक अंजना गोयल ने मंडल के सभी निजी स्कूलों को अपने यहां की फीस का स्ट्रक्चर स्कूल की वेबसाइट पर पंद्रह दिन में अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। मंडलीय समिति के अध्यक्ष कमिश्नर डॉ. पीवी जगनमोहन ने वेबसाइट पर फीस स्ट्रक्चर अपलोड न करने वाले स्कूलों को चिन्हित कर कार्रवाई के निर्देश संयुक्त शिक्षा निदेशक को दिए हैं।

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शिकायतों पर कई स्कूलों को नोटिस

मनमानी फीस और निर्धारित दुकान से यूनिफार्म, किताबें खरीदने के लिए बाध्य किए जाने पर शहर के कई नामी स्कूलों को डीआइओएस ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इनमें जीपीएम कॉलेज, हार्टमैन कॉलेज, जीआरएम कॉलेज, सेंट मारिया गोरेटी इंटर कॉलेज, सोबती पब्लिक स्कूल, काम्पीटेंट पब्लिक स्कूल सीबीगंज, हांडा पब्लिक स्कूल और जनता इंग्लिश स्कूल प्रमुख हैं। डीआइओएस डॉ. अचल कुमार मिश्र ने बताया कि जवाब के लिए 15 दिन का मौका दिया गया है। जवाब आने के बाद जिला स्तरीय कमेटी डीएम की अध्यक्षता में मामलों में कार्रवाई पर विचार करेगी।

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स्कूल जाने लगा बीबीएल से निकाला बच्चा

फीस जमा न किए जाने पर कक्षा सात के जिस बच्चे को बीबीएल पब्लिक स्कूल से निकाल दिया गया, वह बुधवार से स्कूल जाने लगा। बच्चे की मां सारिका आर्य ने बताया कि स्कूल के प्रधानाचार्य ने उनको बुलाया था। उन्होंने बकाया फीस किश्तों में जमा करने पर सहमति दे दी और बच्चे को नियमित स्कूल भेजने को कहा।

ख्वाजा कुतुब में रहने वाली सारिका आर्य ने पिछले महीने किला थाने में तहरीर देकर बीबीएल स्कूल के प्रबंधक और प्रिंसिपल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। तहरीर के मुताबिक, सारिका के बेटे को कक्षा सात की कक्षा में इसलिए बैठाने से इन्कार कर दिया गया क्योंकि 11 हजार रुपये फीस जमा नहीं हुई थी। 16 अप्रैल को बच्चे की टीसी काट दी गई। इसके बाद सारिका ने महापौर डॉ. उमेश गौतम से शिकायत की तो उन्होंने मुकदमा दर्ज कराने को कहा। मामला हाईकोर्ट तक भी पहुंचा था। वहीं, इस मामले में आरटीआइ कार्यकर्ता एडवोकेट खालिद जिलानी ने राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई है।

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क्या कहते हैं अफसर

कमिश्नर के आदेश पर स्कूलों को अपनी फीस स्ट्रक्चर वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। 15 दिन में उनको ऐसा करना है।

-अंजना गोयल, संयुक्त शिक्षा निदेशक

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अभिभावकों के शोषण की शिकायत को लेकर डीएम के आदेश पर कई स्कूलों को नोटिस जारी किए हैं। यदि स्कूल प्रबंधक और प्रिंसिपल 15 दिन में जवाब नहीं देंगे तो यह मानते हुए कि उन्हें कुछ नहीं कहना, उनके खिलाफ जनपदीय समिति कार्रवाई करेगी।

-डॉ. अचल कुमार मिश्र, डीआइओएस

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अफसर यदि कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करेंगे तो इस अधिनियम का कोई औचित्य नहीं है। पहले भी ऐसे नियम बने हैं। वैसे भी, कार्रवाई में अब देरी हो रही है, क्योंकि स्कूल वाले एडमिशन की शुरुआत में ही खेल कर चुके हैं।

-खालिद जिलानी एडवोकेट, आरटीआइ कार्यकर्ता

Posted By: Jagran

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