जेएनएन, बरेली। शहर के नवादा शेखान की राजीव कॉलोनी। सरकारी रिकॉर्ड में यह वैध है। नगर निगम यहा टैक्स भी वसूल रहा है। कॉलोनी सरकारी सुविधाओं का सच बया कर रही है। बिजली के तार लकड़ी की बल्ली पर टिके हैं। लोहे या सीमेंट के खंभे इसलिए नहीं लगे सके, क्योंकि इसके लिए कॉलोनाइजर से लेकर बीडीए और बिजली विभाग के अफसरों का रवैया उदासीन है। वे राहत की गेंद को एक-दूसरे की तरफ सरका रहे हैं। ऐसे में कॉलोनी के बाशिदे एक साल से भटक रहे हैं।

- प्लॉट काटा, नहीं दी सुविधाएं : यह कॉलोनी सेटेलाइट के पीछे मौर्या परिवार की जमीन पर आबाद हुई है। दर्जनों प्लॉट बेचे और कॉलोनी विकसित की। बिजली तो पहुंच गई लेकिन लोहे, सीमेंट के खंभे नहीं लग सके। बिजली महकमे के अनुसार प्लॉट काटने वाले को ही एस्टीमेट के अनुसार लाइन बिछाने के लिए फीस जमा करनी होती है, जो नहीं हुई। बीडीए ने भी बिना देखे इसे वैध करार दे दिया। अब बाबत बातचीत की गई तो सीटीपी आशीष शिवपुरी जाच कराने की बात कहते हैं। - खुद खरीदे पोल, फिर भी नहीं लगा रहे : स्पार्किग से कई बार बल्लियों में आग लगी। जेई से बिजली पोल लगाने को कहा। जवाब मिला बजट नहीं है। साल भर पहले लोगों ने ही प्रति खंभा तीन हजार रुपये के हिसाब से सीमेंटेड पोल खरीदे। अभी तक पोल जमीन पर ही पड़े हैं। अधिकारियों का कहना है कि कोई खुद पोल या अन्य सामान खरीद ले तो प्रॉपर चेकिंग, सुपरविजन शुल्क जमा करने के बाद एमडी की अप्रूवल पर बिजली महकमा कनेक्शन जोड़ता है।

- बिना पोल लगाए दे दिए बिजली कनेक्शन : नियमानुसार किसी मकान से 40 मीटर ज्यादा दूर होने पर दूसरे बिजली पोल पर लाइन खिंचती है। प्लॉटिंग करने वाले ने शुल्क जमा नहीं किया तो लाइन नहीं खींची गई। राजीव नगर के लोग बिजली कनेक्शन के लिए सब स्टेशन पहुंचे। तब अधिकारियों ने बिना पोल लगाए साठ से सत्तर मीटर दूर दर्जनों तार बल्लियों पर ही खींचकर बिजली कनेक्शन दे दिए। - प्लॉट बेचने वालों को ही बिजली की व्यवस्था करनी होती है : अधीक्षण अभियंता (शहर) एनके मिश्र ने बताया कि प्लॉट बेचने वाले को ही बिजली व्यवस्था करना होती है। लोग महज कनेक्शन लेते हैं। इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। नियमानुसार एमडी की अप्रूवल होने पर ही लोगों के खरीदे पोल लगाए जा सकते हैं। समस्या देख एक्सईएन से समस्या का हल निकालने को कहा है।

By Jagran