जागरण संवाददाता, बरेली : खालसा पंथ के स्थापना दिवस पर मनाये जाने वाले वैशाखी पर्व की रंगत शहर में जगह-जगह दिखने लगी। आज कई बड़े आयोजन होंगे जिनकी तैयारियां पूरी कर ली गई। वैशाख मास की पहली तिथि को होने वाले इस पर्व पर सोमवार को मुख्य आयोजन वैशाखी मेला मैदान में होगा। इसमें बाहर से आए रागी जत्थे संगत को निहाल करेंगे। साथ ही गुरु का अटूट लंगर भी बरताया जाएगा।

मॉडल टाउन गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान मालिक सिंह कालरा ने बताया कि 30 मार्च 1699 को गुरु गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना श्री आनंदपुर साहिब (पंजाब) में गुरु तेग बहादुर की मुगलकाल में हुई शहादत के बाद की। गुरु की शहादत के बाद कोई उनकी देह उठाने की हिम्मत नहीं कर सका। उधर से गुजर रहे सरकारी ठेकेदार लक्खी सिंह बंजारा ने उनकी देह को उठा अंतिम संस्कार के लिए अपने घर में आग लगा दी। जब अन्य साथी जैता उनके शीश को लेकर गुरु के घर पहुंचे। तब उनके पुत्र गुरु गोविंद राय ने पूछा कि क्या वहां कोई अन्य सिक्ख नहीं था?

पंच प्यारों को अमृत छकाकर खुद छका अमृत

कार्यक्रमों की तैयारी में जुटे गरू ने वैशाखी वाले दिन 80 हजार संगतों के बीच शीश की मांग की। इस पर पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण चारों दिशाओं और मध्य हस्तिनापुर (दिल्ली) से पांच लोग खुद आगे आए। उन्होंने पांचों लोगों को खेमे में ले गए, फिर उनके शीश धड़ से अलग कर दिए। इसके बाद अमृत तैयार कर पांचों को फिर से जीवित किया और अमृत छकाकर पंच प्यारे बनाया। इसके बाद स्वयं को उनसे अमृत छकाने का निवेदन किया। फिर अमृत छककर वह स्वयं भी गुरु गोविंद राय से गुरु गोविंद सिंह बन गए।

अमृत चखकर बनता है सच्चा सिख

सच्चा सिक्ख वही माना जाता है, जिसने अमृत छक रखा हो। चूंकि गुरु और पंच प्यारों ने भी वैशाखी पर ही अमृत छका था। इसलिए सभी सिक्ख वैशाखी पर ही अमृत छककर खालसा पंथ के नियम मानने का संकल्प लेते हैं।

पंच प्यारों के नाम का महत्व

भाई दया सिंह:- जीवों के प्रति दया का भाव हो।

भाई धर्म सिंह:- धर्म के प्रति आस्थावान।

भाई हिम्मत सिंह:- असहाय लोगों की रक्षा करने का साहस हो।

भाई मोहकम सिंह:- किसी चीज के प्रति मोह नहीं हो।

भाई साहिब सिंह:- जिसमें चारों गुण हो, वह स्वयं ही साहिब होगा।

सिक्खों के पंच ककार और नियम

पंथ की स्थापना के साथ ही सिक्खों के पंच ककार केश, कड़ा, कच्छ, कृपाण, कंघा रखना अनिवार्य किए। साथ ही सुबह नियम पूर्वक नित नेम की पांच वाणियां, शाम के समय रहिरास साहिब का पाठ और रात में सोने से सोहिला साहिब का पाठ अनिवार्य है।

गुरुद्वारे से निकलेगी श्री गुरुग्रंथ साहिब की पालकी

वैशाखी पर्व पर मॉडल टाउन स्थित वैशाखी मेला ग्राउंड में मुख्य दीवान सजेगा। इसकी शुरुआत सुबह नौ बजे से होगी। इससे पहले साढ़े आठ बजे गुरुद्वारे से श्री गुरु ग्रंथ साहिब की पालकी निकलेगी, जो निश्चित मार्गो से होती हुई कार्यक्रम स्थल पहुंचेगी। फिर ससम्मान उन्हें कार्यक्रम स्थल पर विराजमान किया जाएगा। इसके बाद ही मुख्य दीवान के कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। इसमें पुनेठा साहिब वाले भाई जसबीर सिंह गुरुवाणी कीर्तन और दिल्ली वाले भाई जगविंदर सिंह गुरमत विचारों से संगत करेंगे। मुख्य आकर्षण बैनर्जी गु्रप द्वारा बाल कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला गुरुवाणी कीर्तन होगा।

सुखमनी साहिब पाठ संग की महिला संगत ने सेवा

वैशाखी स्थल पर शनिवार को होने वाले लंगर के लिए महिला संगत ने शुक्रवार को पहुंचकर सेवा की। इस दौरान उन्होंने सुखमनी साहिब का पाठ करते हुए लंगर की पूरी सब्जी काटी।