बरेली, जेएनएन। सावधान! इंटरनेट मीडिया के विस्तार के दौर में साइबर ठगी का खेल भी तेजी से बढ़ रहा है। हाल में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं कि व्यक्ति द्वारा सामने वाले व्यक्ति से किसी भी प्रकार की जानकारी न साझा करने पर भी हजारों व लाखों की चपत लग जा रही है। ठगों के ऐसे पैतरे से साइबर विशेषज्ञ भी हैरान हैं।

साइबर विशेषज्ञों की माने तो शुरुआत में ओटीपी नंबर बता देने पर ठगी के मामले सबसे ज्यादा सामने आते थे। लोग जागरूक हुए तो ठगों ने पैतरा बदल लिया। अब लिंक व लाभ का झांसा देकर ठगी का पैतरा अपनाया जा रहा है। हाल में ऐसे मामले सामने आए हैं कि महज फोन उठा लेने भर से खाते से हजारों-लाखों की रकम पार हो गई है । लाभ के फेर में फंसाने का साइबर ठगों ने सबसे मजबूत तरीका अपनाया है। इसमे अच्छे-अच्छे लोग फंस जा रहे हैं। ऐसे में साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि अनजान फाेन नंबरों से बचें। साथ ही बेहद सतर्क व जागरूक रहे।

 केस नंबर एक 

लाभ के लालच में चले गए 63 हजार

लाभ के लालच में डेलापीर की रहने वाली एक छात्रा 63 हजार रुपये गवां बैठी। ठग ने बेहद ही शातिराना तरीके से छात्रा को अपनी बातों में उलझाया। लाभ का लालच दिया। भरोसे के लिए खुद को छात्रा के पिता का मित्र बताया। पांच रुपये डाल अकांउट चेक करने की बात कही। छात्रा ने अकांउट नंबर दे दिया। उधर से पांच रुपये ठग ने डाल दिए। पांच रुपये डालने के बाद छात्रा के खाते से 63 हजार रुपये उड़ा दिए। छात्रा को जानकारी तब हुई जब उसके मोबाइल पर रकम कटने का संदेश आया।

केस नंबर दो 

बिना जानकारी साझा किए ही कट गए 80 हजार

धौरेहरा माफी बैरियर नंबर दाे के रहने वाले अजय कुमार के पास क्रेडिट वेरिफिकेशन के लिए फोन आया। युवक ने क्रेडिट नंबर साझा करने से इन्कार कर दिया। युवक फोन रखता है कि उसके खाते में करीब अस्सी हजार रुपये उड़ने का संदेश आता है। पीड़ित के मुताबिक, ठग के पास उसके नंबर की सारी जानकारी थी। ठग ने क्रेडिट कार्ड की पूरी डिटेल साझा की थी।

ये बरतें सावधानी :

- ओटीपी, यूपीआइ, एटीएम पिन किसी को न बताएं।

- केवाइसी के लिए एसएमएस पर ध्यान न दें।

- केवाइसी के नाम पर दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क भी न करें।

- एटीएम से कैश निकालते समय किसी बाहरी व्यक्ति की मदद न लें।

- बिना गार्ड वाले एटीएम मशीन का इस्तेमाल न करें।

- एटीएम कार्ड की सफेद पट्टी पर नाम जरूर लिखे।

- ऑनलाइन खरीदारी या सामान बेचते समय रिक्वेस्ट मनी लिंक का इस्तेमाल न करें।

- गूगल से कस्टमर केयर नंबर सर्च न करें।

- फेसबुक पर सस्ती गाड़ी, मोटर साइकिल व अन्य कोई सामान खरीदने के लालच में न आए।

- सोशल चैट से मांगे गए धन की मांग पर भरोसा न करें।

- ऑनलाइन धन की मांग करने पर संबंधित को फोन कर पुष्टि जरूर करें कि वह परिचित है कि नहीं।

- रिमोट एप क्विक सपोर्ट, एनी डेस्क, टीम व्हीवर का इस्तेमाल न करें।

- फर्जी एनईएफटी व आरटीजीएस पर भरोसा न करें, भुगतान प्रात होने पर ही सामान की डिलवरी करें।

क्या कहना है पुलिस का 

एसपी क्राइम सुशील कुमार का कहना है कि ऑनलाइन ठगी के मामले दिनोदिन बढ़ते जा रहे हैं। ऑनलाइन ठगी से बचने का एक ही उपाय है जागरूकता। छोटी-छोटी सावधानियों का पालन यदि हम करेें तो हमें कोई भी ठगी का शिकार नहीं बना सकता। लिहाजा, जरूरी है कि बेहद सतर्क रहें। अनजान लोगों से दूरी बनाए।

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