अंकित गुप्ता, बरेली: महंगी बाइक और कारों के शौकीन दो भाइयों ने एक पुरानी बाइक के लिए फेसबुक फ्रेंड की हत्या कर दी हत्याकांड की बात सामने आने से पहले गगन के घर क्यों गई थी पुलिस, छह अक्टूबर तक लकी की हत्या होने की जानकारी किसी को नहीं थी। लेकिन पुलिस गगन और दीपक को पकड़ चुकी थी। सूत्रों की माने तो पुलिस को सूचना थी कि महानगर निवासी ये दोनों युवक लूट और चोरी की घटनाओं में शामिल हैं। इस पर पुलिस ने दोनों को उठाया तो इनके पास से कई मोबाइल और जेवरात भी बरामद हुए थे।

मुखबिर ने ही दारोगा के मोबाइल पर बाइक की फोटो भी भेजी थी। बाइक की फोटो देखते समय ही लकी के पिता ने उसे पहचान लिया था। जिसकी पुष्टि नंबर के आधार पर ऑनलाइन आरसी मंगाकर थाने में ही की थी। आरसी में जब लकी के पिता का नाम सामने आया तो उसी दारोगा ने कहा था कि अरे यह तो केस ही बदल गया। इसके बाद पुलिस ने देर रात कबाड़ी के घर से बाइक बरामद की। अगले दिन दोनों को यह कहते हुए छोड़ दिया गया कि उन्हें लकी के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

मोबाइल और जेवर बरामद हुए मगर गए कहां

गगन और दीपक को जब पुलिस ने पहली बार उठाया तो करीब 15 मोबाइल और मुट्ठी भर जेवरात बरामद हुए थे। जैसी की चर्चा है कि पुलिस ने किसी की सिफारिश के बाद उन्हें छोड़ दिया था। अब जब हत्या खोली गई तो भी पुलिस ने उस उन मोबाइल और जेवरात का जिक्र नहीं किया, आखिर गए कहां।

बाइक का पता चला फिर भी गगन को छोड़ा

 पुलिस को जब बाइक गगन और दीपक की निशानदेही पर बरामद हुई थी, तो पुलिस ने उन्हें क्यों छोड़ा। पुलिस को यह भी पता चल गया था कि बाइक गगन ने अपने भाई को फिर भाई ने अपने एक दोस्त को दी थी। इसके बाद उस दोस्त ने बाइक कबाड़ी को दे दी थी। सवाल यह है कि पुलिस दोनों से उसी समय सख्ती से पूछताछ क्यों नहीं की। वहीं क्राइम ब्रांच ने कॉल डिटेल से राजफाश का दावा किया मगर यह काम तो थाना पुलिस भी पहले कर चुकी होगी।

नहीं चेक किए सीसीटीवी फुटेज, खुलने लगी पर्ते

पुलिस का कहना है कि दोनों भाईयों से लकी के बारे में कई बार पूछताछ की लेकिन गगन ने लकी के महानगर कालोनी गेट तक आने और वहीं से फनसिटी तक जाने की बात कही थी। पुलिस के अनुसार उन्होंने फनसिटी में जाकर चेक किया था तो गार्ड ने तीन लड़कों के आने की बात भी कही थी। अब सवाल यह है कि पुलिस ने फन सिटी में लगे सीसीटीवी चेक क्यों नहीं किए।

पुलिस पचा गई थी घटनाक्रम, सीएम से मिले थे परिजन

पुलिस तो इस पूरे घटनाक्रम को पचा ही गई थी। परिजनों ने जब कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना से मुलाकात कर मदद मांगी तो जिले के एक बड़े अधिकारी ने मंत्री से भी यही बात कही थी कि वह पूरी जानकारी कर चुके हैं, लकी गुस्से में कहीं गया है वह वापस आ जाएगा। इसके बाद परिजन मंत्री का पत्र लेकर सीएम से मिले। सीएम ने जब जांच कर प्रकरण की प्रगति के बारे में जानकारी मांगी तो पुलिस ने कुछ ही दिनों में घटना का राजफाश कर दिया।सुनकर अजीब लगेगा मगर लकी हत्याकांड का खुलासा करते वक्त पुलिस बार-बार यही कहानी दोहराती रही। इस अधूरी कहानी में तमाम सवाल बाकी थे, जिनके जवाब तलाशने के लिए जागरण ने कई पहलुओं पर जानकारी जुटाई तो चौंकाने वाली बातें सामने आईं। खासकर ऐसी बातें जो पुलिस की भूमिका पर बड़ा सवाल खड़ा रहीं। सुभाषनगर थाने से जुड़े कुछ लोग, लकी के परिजन और पूरे घटनाक्रम से जुड़ी कुछ कडिय़ां इशारा कर रहीं कि हत्यारोपित व पुलिस कई और राज भी छिपाए बैठी है।

पड़ोसियों की जुबानी सामने आई माल बरामदगी की कहानी

जागरण टीम जब महानगर कॉलोनी पहुंची तो पड़ोसियों ने बताया कि छह अक्टूबर को एक दारोगा ने दबिश दी थी। गगन व उसके भाई को करीब एक दर्जन मोबाइल फोन व कुछ जेवरों के साथ पकड़ा था। थाने ले गए, मगर बाद में दोनों छूटकर आ गए। इस दौरान पुलिस व उन दोनों के बीच क्या हुआ यह नहीं पता। 

कॉल डिटेल क्यों दबाए बैठी रही पुलिस 

क्राइम ब्रांच ने कॉल डिटेल से खुलासे का दावा किया मगर यह काम तो थाना पुलिस भी पहले कर चुकी होगी। यदि ऐसा हुआ तो इस तथ्य को छिपाया क्यों गया। दूसरी बात यह कि यदि बाइक बरामदगी के बाद गगन व उसके भाई पर शक हुआ तो कॉल डिटेल निकलवाकर लकी के नंबर से मिलान कर पूछताछ क्यों नहीं की गई।

Posted By: Abhishek Pandey

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