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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 09, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अस्पताल की ओर बढ़ रहे थे कदम, मौत ने बेड़ियां डाल दीं

By JagranEdited By:
Published: Sun, 09 Sep 2018 10:32 AM (IST)

बेबसी और लाचारी से घिरी एक मां के लिए शनिवार का दिन कभी खत्म नहीं हुई

अस्पताल की ओर बढ़ रहे थे कदम, मौत ने बेड़ियां डाल दीं
अस्पताल की ओर बढ़ रहे थे कदम, मौत ने बेड़ियां डाल दीं

जागरण संवाददाता, बरेली : बेबसी और लाचारी से घिरी एक मां के लिए शनिवार का दिन कभी खत्म नहीं होने वाली अमावस की रात बन गया। तीन महीने से पति के जेल में है। घर फांके पड़े हैं। तीन बच्चों को किसी तरह पाल रही थी, कि बड़ी बेटी को दो दिन पहले बुखार ने जकड़ लिया। मुहल्ले के दवाखाने से दवा लाई। शनिवार को फिर उसकी तबीयत बिगड़ गई। घर में इतने पैसे नहीं थे कि बेटी को ऑटो या किसी सवारी से तुरंत अस्पताल ले जा सके। दो छोटे बच्चों को गोद में लेकर बेटी को पैदल ही लेकर चल पड़ी। कदम अस्पताल की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन रास्ते में ही मौत ने बेड़ियां डाल दीं। बेटी रास्ते में लड़खड़ाकर गिरी तो फिर उठ नहीं पाई। दो युवकों ने ई-रिक्शा कर उन्हें अस्पताल भेजा। डॉक्टरों ने बेटी मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने बेटे को देखा तो उसे भी तेज बुखार था। बेटी को उसे भर्ती किया और बेटी का शव घर ले जाने के लिए एंबुलेंस मंगवाई।

दुखों का यह पहाड़ टूटा सुभाषनगर की शांति विहार कालोनी निवासी गुड्डो देवी पर। बेटी शशि को शुक्रवार से तेज बुखार था। नजदीक के प्राइवेट डॉक्टर को दिखाने के लिए पैसे नहीं थे। पांच साल की बेटी निशा और 11 माह के बेटे संदीप को गोद में लेकर अस्पताल को निकली थी। अस्पताल में बेटी को स्ट्रेचर पर डालकर भीतर लाई। लेकिन, डॉक्टरों ने जो जवाब दिया तो उससे मां का दिल बैठ गया। स्ट्रेचर पर बेटी नहीं, उसकी लाश थी।

बेटे को भी था तेज बुखार

डॉक्टरों ने गुड्डो के बेटे संदीप को भी बुखार और खून की कमी बताई। बदहवास मां डॉक्टर के हाथ जोड़कर बोली, बेटी तो मर गई अब बेटे को भर्ती कर लो। डॉक्टर ने तुरंत संदीप को भर्ती करने के लिए फाइल बना ली। कुछ देर बाद गुड्डो के जेठ कुंवरपाल और मामा दिनेश पहुंचे तो शशि के शव को एंबुलेंस से लेकर गए। एक अन्य रिश्तेदार ने बेटे संदीप को भर्ती किया और उसके साथ रुक गई। गुड्डो पहले शशि के शव को घर छोड़कर आई फिर अस्पताल में भर्ती बेटे के पास पहुंच गई। रिश्तेदारों ने बेटी शशि का अंतिम संस्कार किया।

झूठे मुकदमे में सजा काट रहा पति

गुड्डो ने बताया कि पति बाबा मूल रूप से शेखूपुर (बदायूं) के निवासी हैं। दस साल से शांति विहार में रहने लगे। पति डेयरी का काम कर रहे थे। तीन महीने पहले लूट के एक झूठे मुकदमे में पुलिस ने जेल भेज दिया। मुकदमे में भैंसें तक बिक गई।

भीड़ के बीच सिर्फ दो मददगार आए सामने

गुड्डो बेटी को लेकर जा रही थी, तभी रास्ते में बेटी के कदम लड़खड़ा गए और गिर गई। रास्ते में सिठौरा निवासी सेल्समैन पुष्पेंद्र शर्मा और उनके साथी रचित दिवाकर ने ई-रिक्शा कराया। बच्चों और महिला को अस्पताल लाए। रिश्तेदारों के पहुंचने तक बच्चों और गुड्डो देवी की मदद में जुटे रहे।